लो आज मुझे कुछ मत कहना । मैं तो फर्म मैं लौट आया । शायद मैच और सिरीज हारने के बाद यही सोच रहे होंगे रविन्द्र जडेजा ।
हम भारतीय बहुत उदार होते है । और यही उदारता है कि हमने हैदराबाद मैच को भावावेश में आकर मेहमान टीम को तोहफा में दे दिया । अगर यह मैच जीत जाते तो सचीन का जादूइ शतक सफल हो जाता, और अगर ऐसा हो जाता तो फिर मीडिया में ये खबर नही बन पाती कि सचीन मैच जीताऊ नही हैं । वैसे भी हम टीम इंडिया हैं, और हमारे पास पावर भी है । ऐसे में क्यू मेहमान को परेशान करें । गोहाटी में देख लेंगे । लेकिन गोहाटी नाम ही भारतीय टीम के ज़ेहन पे छा गई । क्योकि सभी खिलाड़ी इन फिल्ड तो गो कर रहे थे पर पिच और फर्म से हटी-हटी नजर आ रहे थे । यानि गो और हटी, गोहाटी ।
टीम इंडिया शायद उस श्रण को सबसे ज्यादा इनजॉय कर रही थी, जब ट्रोफी मेहमान को दिया जा रहा था । क्योकि भारतीय संस्कार के मुताबिक अतिथी का सम्मान करना और अतिथी को खुश करना ही सबसे बड़ी जीत होती है । और आप सभी को तो ये पता भी होगा अतिथी देवो भवः ।
अब औपचारिकता शेष है, और अगर हम मैच जीत भी जाते हैं तो भी हमारे मेहमान को बुरा नही लगेगा । टीम इंडिया ।
हर सुबह का उगता सूरज एक नयी उम्मीद लेके आता है..लेकिन हर शाम के ढ़लते सूरज के साथ ये उम्मीदें तोड़ देती है । इंतज़ार है अब बस एक रौशन सुबह की...
Tuesday, 10 November 2009
Sunday, 8 November 2009
बने इंटरनेट यूज़र
एक ऐसा दौड़ था कि खबरो को जोड़ने के लिए संमवदीया ही जरीया हुआ करता था । और जब संमवदीया कभी भी किसी खबर को लेकर पहुचता था तो, उस खबर में वही आवेग होता था, जो मूल खबर होती थी। धिरे-धिरे पत्र पत्रकारिता का दौड़ आया और फिर समाज की मांग ने खबरों को टी.वी से जोड़ते हुये इलेक्ट्रोनिक बना दिया । जै
इंटरनेट ने तो सभी तरह के भरम को दूर कर दिया और देवताओं के संमवदीया नारद को भी पिछे छोड़ दिया है
भारत में इंटरनेट को आये एक दशक से अधिक हो चुका है। लेकिन अभी भी इंटरनेट की पहुच एक खास शहरो तक या यूँ कह सकते है कि एक खास शिक्षित वर्ग तक ही सिमटी हुई है । ऐसे में बिहार के एक छोटे से कस्वे पुपरी में ‘नीटिजन कम्प्यूटर’ ने नगरवासियों को इंटरनेट से रु-ब-रु कराया । और एक संगोष्ठी का आयोजन कर नगर के शिक्षाविदों, डॉक्टर, वकील और पत्रकारों को इंटरनेट यूज़र बनने की अपील की । मौका था ‘नीटिजन कम्प्यूटर’ के वेवसाइड लाँच का । इस मौके पर ‘नीटिजन कम्प्यूटर’ के संस्थापक निर्देशक पंकज झा ने कहा के हम तकनीक से दूर रहकर विकसित समाज की कल्पना नही कर सकते हैं । आज का युग इंटरनेट युग हो गया है इसलिए कम्प्यूटर की जानकारी सभी के लिए आवश्यक हो गया है । अगर हमें शहरो का मुकाबला करना है तो नेट ही वो एक मात्र जरिया है, जिससे हम शहरी परिवेश और शहर की गतिविधियों पर नज़र रख सकते है । पंकज झा पिछले सात वर्षों से इस संस्था को चला रहें हैं । अभी इनकी ये संस्था “विश्व कम्प्यूटर साक्षरता मिशन” से जुड़ी हुइ है ।
पंकज जी कहते है कि ग्रामिणों में कम्प्यूटर को लेकर एक भर्म बना हुआ है, की इसे अंग्रेजी जानने वाले ही पढ़ सकते हैं । और यह उच्चे तपको के लोगों की पढ़ाई हैं । पंकज झा के अनुसार इस संगोष्ठी के
बाद लोगों की राय बदली है ।
और उनकी यह संस्था आगे भी पुपरी नगर में इस तरह का आयोजन कर, लोगो को कम्प्यूटर और इंटरनेट के प्रति जागृत करती रहेगी
।
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