लो आज मुझे कुछ मत कहना । मैं तो फर्म मैं लौट आया । शायद मैच और सिरीज हारने के बाद यही सोच रहे होंगे रविन्द्र जडेजा ।
हम भारतीय बहुत उदार होते है । और यही उदारता है कि हमने हैदराबाद मैच को भावावेश में आकर मेहमान टीम को तोहफा में दे दिया । अगर यह मैच जीत जाते तो सचीन का जादूइ शतक सफल हो जाता, और अगर ऐसा हो जाता तो फिर मीडिया में ये खबर नही बन पाती कि सचीन मैच जीताऊ नही हैं । वैसे भी हम टीम इंडिया हैं, और हमारे पास पावर भी है । ऐसे में क्यू मेहमान को परेशान करें । गोहाटी में देख लेंगे । लेकिन गोहाटी नाम ही भारतीय टीम के ज़ेहन पे छा गई । क्योकि सभी खिलाड़ी इन फिल्ड तो गो कर रहे थे पर पिच और फर्म से हटी-हटी नजर आ रहे थे । यानि गो और हटी, गोहाटी ।
टीम इंडिया शायद उस श्रण को सबसे ज्यादा इनजॉय कर रही थी, जब ट्रोफी मेहमान को दिया जा रहा था । क्योकि भारतीय संस्कार के मुताबिक अतिथी का सम्मान करना और अतिथी को खुश करना ही सबसे बड़ी जीत होती है । और आप सभी को तो ये पता भी होगा अतिथी देवो भवः ।
अब औपचारिकता शेष है, और अगर हम मैच जीत भी जाते हैं तो भी हमारे मेहमान को बुरा नही लगेगा । टीम इंडिया ।
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