प्यार कोई खेल नही हाँ ! यह वाक्य उन लोगों को तो सावधान करती है जिन्हें कोई भी खेल खेलने में बहुत मजा आता है, और जो सोचते है कि खेल स्वास्थय और मनोरंजन के लिए आवश्यक है लेकिन ये लोग इस वाक्य (प्यार कोई खेल नही) को सुनने के बाद थोड़ा डर जाते है कि “प्यार किया नही जाता हो जाता है”। तब ऐसी स्थिति में ये लोग प्यार को कुछ इस तरह बताते है “प्यार है क्या एक रोग बुरा”


या न मानिये प्यार के तो कई रंग होते है और सभी रंग बिलकुल रंगीन होते है । जिसको जो रंग भाया वह उसी प्यार के रंग में रंगीन हो गया । मेरे मित्र का मानना है कि प्यार करना चाहिए। और जब भी उन से मुलाकात होती है तो वो मुझे कहता है, मुझे प्यार हो गया है, और उसके कहने का अंदाज कुछ इस तरह होता है “थोड़ा सा प्यार हुआ है थो़ड़ा है बाकी” जब मुझसे वो कहता है कि थोड़ा सा प्यार हुआ है, तो मैं उससे ईक बार पुछ बैढ़ा कि यार ये बता तुझे छः महिनों से थोड़ा सा प्यार हुआ है थोड़ा बाकी है, कब पुरा प्यार होगा ? तो इस सवाल को सुन के मेरे मित्र बड़े ही संजिदगी के साथ कहता है कि यार “प्यार मौसम को नही देखती है प्यार को सूखे और पतझड़,सावन और बसंत से मतलब नही है” । प्यार तो एक ऐसा पंछी है जो जंगल के हर डाल पे बैढ़ना चाहता है और तु तो पत्रकारिता कर रहा है तुझे तो मालुम होना चाहिए कि पंछी को कभी पिंजरे में कैद नही करना चाहिए । मैं उसके इस जवाब से थोड़ा सा दंग रह गया पर मेरे मित्र के प्यार सिद्धांत को समझने के लिए मैं और उत्सुक हो गया । मैंने उससे कहा कि यार तु तो बचपन से ही बहुत बड़ा बातुनी है और पत्रकारिता तो तुझे करनी चाहिये थी । तु मुझे अपने इस सिद्धांत को साफ-साफ शब्दों में बता । मेरे प्रशंसा को सुन वह हँसने लगता है और कहता है , मस्का लगाने की जरुरत नही है । मेरे प्यार सिद्धांत में पंछी मेरा दिल है और जंगल यह सारा संसार है, पेड़ की वो सारी डालियाँ प्यारी-प्यारी खुबसुरत सी हसीन लड़कियां है और पिजरे का मतलब है किसी एक लड़की से प्यार कर के बैढ़ जाना । और हर पंछो आजाद रहना चाहता है । मुझे तो हर पल प्यार होता है , हर खुबसुरत लड़की मेरे दिल पे राज करती है । इसलिए मुझे हमेशा लगता है कि “मुझे प्यार दो मुझे प्यार दो दिल बेकरार है प्यार दो, वर्षो किया मैंने इंतजार मुझे प्यार दो मुझे प्यार दो” ।
यार तु ही सोच न आँधी-तुफान और प्यार कभी बता के आता है, नही न । तो फिर..... मैं कैसे इस प्यार को रोक लू.......सबसे अजीब बात तो यह है मेरे प्यार कि की दिल को बरसात में भींगे बाल अच्छे लगते है तो सर्दियों में सहमें चाल , गर्मियों में पोछती पसीना तो बसंत में फूलो की तरह खिलती हँसी बेमिशाल । अब भला तु ही फैसला कर , दिल तो एक है पर हसिनाएँ......... गिना नही जा सकता । मैं अगर अपने दिल को खुश करने के लिए कुछ हसीनाओं से प्यार कर लेता हूँ तो इन हसीनाओं का क्या जायेगा । वैसे तुझे तो पता है “सारा जमाना हसीनो का दिवाना , जमाना कहें फिर क्यों बुरा है दिल लगाना” ।
यार मेरे दिल में बहुत प्यार है और मैं अपने प्यार को बांटना चाहता हूं । इसीलिए तो ये नायाब राश्ता मैंने अपनाया है “क्योकि प्यार नही वो चीज़ जो बाजार में मिल जाए” और “कैसे खरिदोगे तुम प्यार को , बिकता नही ये बाजार में” और वैसे भी हमारे देश में आय से अधिक संपत्ति रखना जुर्म है । तो फिर तुम मुझे ये बताओं कि प्यार से अधिक प्यार रखना जुर्म नही है । मैं प्यार के नजरो में जुर्म नही करना चाहता हुँ । इसीलिए प्यार बांटता हूँ और हरेक कुछ दिनों बाद अपनी गर्लफ्रेंड बदल लेता हूँ । प्यार को लेकर के मेरे मन में जो श्रद्धा है, लोग शायद समझ नही पाते है । मैं अपने आर्दश के रुप में भगवान श्री कृष्ण को मानता हूँ । मुझे कृष्ण की लिलाओं से सिख मिली है , मेरे दोस्त ।
प्यार की मर्यादा भंग न हो, इसीलिए मैं अलग-अलग लड़कियों से प्यार करता हूँ क्योकि “प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो” ।
इसी बीच वह कहता है कि अब जब तुम प्यार का ज्रिक कर दिया है तो पूरी सिद्धांत सुन के ही जाना । आओ बैठ के चाय पीते है । क्योकि चाय के चुस्की के साथ संवाद अच्छे निकलेगे ।
मैं अपने दोस्त के प्यार सिद्धांत की विस्तृत विवरण लय से अचंभित था । और सोच रहा था कि मेरे दोस्त ने प्यार सिद्धांत के हरेक विषय को किस तार्किक लय से प्रस्तुत कर रहा है । शायद पॉजिटिव थिंक का उदाहरण देना हो तो मेरा यह दोस्त मुझे सबसे पहले याद आयेगा ।
हूँ ! तो प्यार सिद्धांत है, है न ।
यार वाकई मैं तो अपने प्यार सिद्धांत से इस समाज को कुछ सिखाना चाहता हुँ कि प्यार के बिना समाज कितना अधुरा है, क्योकि “दूनिया में आये हो तो लव कर लो, थोड़ा सा जी लो, थोड़ा मर लो” ।
तुझे पता है मैने बजाफते एक गर्लफ्रेंड लिस्ट बना रखी है, और यह लिस्ट क्यूँ बनाई है जानना चाहेगा क्योकि इस लिस्ट के माध्यम से मैं एक सर्वे कर सकुँ, और समाज की स्थिति अभिव्यक्त कर सकुँ । यह लिस्ट मुझे अपनी पुरानी गर्लफ्रेंड से संर्पक बनाये रखने में सहायता करता है । और मैं इस लिस्ट के आधार पर उन सभी का हाल जान लेता हूँ ।
और तो और मैं तुम्हे बता दूँ, लगभगत. वो सारी लड़कियाँ जो कभी मेरी गर्लफ्रेंड हुआ करती थी, आज बॉयफ्रेंड के नाम से चिढ़ती है । इस तरह अगर मेरे प्यार सिद्धांत को दूसरी नजरिया से देखोगे तो तुम्हे लगेगा कि मैं एक समाज सुधारक का काम कर रहा हुं । समाज में बढ़ रही बॉयफ्रेंड- गर्लफ्रेंड रिवाज़ को कम रहा हूँ ।
इतना कहते कहते मेरे दोस्त की आँखें भर आई और मैं अपने दोस्त के होथो को धिरे से पकड़ के दबाया और एक अपरिभाषित लहजे में कहा कि मैं तेरे दर्द को समझ सकता हुं यार.......... तुम तो सचमुच में अपना जीवन समाज सुधार कार्य में लीन कर चुके हो ।
इस वाक्य को सुनते ही मेरा दोस्त मेरे तरफ उम्मीद की नजर के साथ देखते हुए कहता है तो चल आज से इस समाज सुधार कार्य में तु भी लग जा और “आई लव यू” का रट्टा ऐसा मार जैसे बचपन में वन, टु, थ्री का रट्टा लगाया था ।
मुझे लगा मैं फंसने वाला हूँ, सो मैंने उसी के लहजे में उस से कहा कि यार हर कोई समाज सुधारक नही हो सकता है अगर ऐसा होता तो समाज को सुधारने की जरुरत ही नही होती । मेरे दोस्त ने मुझसे तभी शिघ्रता से पुछा, तेरी गर्लफ्रेंड का क्या हाल है, तुम्हारी..........
मेरे चेहरे पे खामोशी छा गई । मुझे लगा मैं उस रेगिस्तान में हुँ जहॉ आँधी ने अचानक दम तोड़ दिया हो । और कह रहा हो “पत्थर के सनम तुझे मैंने मोहब्बत का खुदा माना” ।
तभी मेरे दोस्त ने कहा, यार तु तो सच्च में इमोशनल हो गया । मुझे पता है तेरे दिल की हालत “और इस दिल में क्या रखा है तेरा ही प्यार छुपा रखा है, चीर के देखे दिल मेरा तो तेरा ही नाम छुपा रखा है” ।
छुपाये रख अपने प्यार को, साले तुझे पता नही आज की लड़कियां दिल चीर के देखने नही आती है । उन्हें तो बस “दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिए बस एक दफा़ मेरा कहा मान लीजिए” ।
और लड़की पटाने का यह सबसे Simple तरिका है । एक दफा लड़कियों का कहना मान लो......फिर वो तुम्हारी.........समझे ......
मैं अपने दोस्त की बातों से ज़रा प्रभावित हो रहा था और मुझसे रहा नही गया । मैं उससे पुछ बैढ़ा कैसे कर पाता है ये सब ...... । इसका जबाब उसने बड़ा सटीक दिया । सब तुम्हारी कृपा है । मैंने कहा मेरी कृपा है.....तो उसने कहा तुम्हारी......मतलब मीडिया की......
मीडिया ने ही सपना दिखाया कर “लो दूनिया मुट्ठी में” मीडिया की वज़ह से ही आज “थींक हट के” है मेरी । मीडिया ने ही डेयरिंग बनाया क्योकि “डर के आगे जीत है” । मीडिया ही करता है “सीधी बात नो बकवास” । मीडिया ने ही मिंटोस लाइफ जीना सिखाया है जहाँ ये नही सोचा जाता है कि मैं कॉलेज में आ गया और अभी तक एक भी लड़की को नही पटा सका, जहाँ ये सोचा जाता है कि इतनी सारी लड़कियां कॉलेज में है और कोई भी मुझे नही पटा सकी । मीडिया ही आइडिया को तवज्जु देती है क्योकि “एक आइडिया जो बदल दे आपकी दूनिया” । कभी कहती है “पास आओ पास आओ” तो कभी एक ऐसी असंतुष्टि पैदा करती है जो “ये दिल मागें मोर” का रट्ट लगाये रहती है ।
मैं अपने दोस्त के हर नजरिये को सुन रहा था किस तरह से वो विज्ञापन के श्लोगनो को भी प्यार करने के लिए उत्तरदायी मानता है ।
मैं अपने ऐसे दोस्तों का परिचय तो करा दूं, जो इस सिद्धांत के वाहक हैं
राजेश रौशन, सोफ्टवेयर इंजीनियर हैं लेकिन प्यार इनका मुख्य विषय है ।
अभिनव अभि, पत्रकारिता कर रहें हैं लेकिन अपने नाम के अनुरुप प्यार में भी नव अभिनव करना इनका शौख़ है ।
यार तु ही सोच न आँधी-तुफान और प्यार कभी बता के आता है, नही न । तो फिर..... मैं कैसे इस प्यार को रोक लू.......सबसे अजीब बात तो यह है मेरे प्यार कि की दिल को बरसात में भींगे बाल अच्छे लगते है तो सर्दियों में सहमें चाल , गर्मियों में पोछती पसीना तो बसंत में फूलो की तरह खिलती हँसी बेमिशाल । अब भला तु ही फैसला कर , दिल तो एक है पर हसिनाएँ......... गिना नही जा सकता । मैं अगर अपने दिल को खुश करने के लिए कुछ हसीनाओं से प्यार कर लेता हूँ तो इन हसीनाओं का क्या जायेगा । वैसे तुझे तो पता है “सारा जमाना हसीनो का दिवाना , जमाना कहें फिर क्यों बुरा है दिल लगाना” ।
यार मेरे दिल में बहुत प्यार है और मैं अपने प्यार को बांटना चाहता हूं । इसीलिए तो ये नायाब राश्ता मैंने अपनाया है “क्योकि प्यार नही वो चीज़ जो बाजार में मिल जाए” और “कैसे खरिदोगे तुम प्यार को , बिकता नही ये बाजार में” और वैसे भी हमारे देश में आय से अधिक संपत्ति रखना जुर्म है । तो फिर तुम मुझे ये बताओं कि प्यार से अधिक प्यार रखना जुर्म नही है । मैं प्यार के नजरो में जुर्म नही करना चाहता हुँ । इसीलिए प्यार बांटता हूँ और हरेक कुछ दिनों बाद अपनी गर्लफ्रेंड बदल लेता हूँ । प्यार को लेकर के मेरे मन में जो श्रद्धा है, लोग शायद समझ नही पाते है । मैं अपने आर्दश के रुप में भगवान श्री कृष्ण को मानता हूँ । मुझे कृष्ण की लिलाओं से सिख मिली है , मेरे दोस्त ।
प्यार की मर्यादा भंग न हो, इसीलिए मैं अलग-अलग लड़कियों से प्यार करता हूँ क्योकि “प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो” ।
इसी बीच वह कहता है कि अब जब तुम प्यार का ज्रिक कर दिया है तो पूरी सिद्धांत सुन के ही जाना । आओ बैठ के चाय पीते है । क्योकि चाय के चुस्की के साथ संवाद अच्छे निकलेगे ।
मैं अपने दोस्त के प्यार सिद्धांत की विस्तृत विवरण लय से अचंभित था । और सोच रहा था कि मेरे दोस्त ने प्यार सिद्धांत के हरेक विषय को किस तार्किक लय से प्रस्तुत कर रहा है । शायद पॉजिटिव थिंक का उदाहरण देना हो तो मेरा यह दोस्त मुझे सबसे पहले याद आयेगा ।
हूँ ! तो प्यार सिद्धांत है, है न ।
यार वाकई मैं तो अपने प्यार सिद्धांत से इस समाज को कुछ सिखाना चाहता हुँ कि प्यार के बिना समाज कितना अधुरा है, क्योकि “दूनिया में आये हो तो लव कर लो, थोड़ा सा जी लो, थोड़ा मर लो” ।
तुझे पता है मैने बजाफते एक गर्लफ्रेंड लिस्ट बना रखी है, और यह लिस्ट क्यूँ बनाई है जानना चाहेगा क्योकि इस लिस्ट के माध्यम से मैं एक सर्वे कर सकुँ, और समाज की स्थिति अभिव्यक्त कर सकुँ । यह लिस्ट मुझे अपनी पुरानी गर्लफ्रेंड से संर्पक बनाये रखने में सहायता करता है । और मैं इस लिस्ट के आधार पर उन सभी का हाल जान लेता हूँ ।
और तो और मैं तुम्हे बता दूँ, लगभगत. वो सारी लड़कियाँ जो कभी मेरी गर्लफ्रेंड हुआ करती थी, आज बॉयफ्रेंड के नाम से चिढ़ती है । इस तरह अगर मेरे प्यार सिद्धांत को दूसरी नजरिया से देखोगे तो तुम्हे लगेगा कि मैं एक समाज सुधारक का काम कर रहा हुं । समाज में बढ़ रही बॉयफ्रेंड- गर्लफ्रेंड रिवाज़ को कम रहा हूँ ।
इतना कहते कहते मेरे दोस्त की आँखें भर आई और मैं अपने दोस्त के होथो को धिरे से पकड़ के दबाया और एक अपरिभाषित लहजे में कहा कि मैं तेरे दर्द को समझ सकता हुं यार.......... तुम तो सचमुच में अपना जीवन समाज सुधार कार्य में लीन कर चुके हो ।
इस वाक्य को सुनते ही मेरा दोस्त मेरे तरफ उम्मीद की नजर के साथ देखते हुए कहता है तो चल आज से इस समाज सुधार कार्य में तु भी लग जा और “आई लव यू” का रट्टा ऐसा मार जैसे बचपन में वन, टु, थ्री का रट्टा लगाया था ।
मुझे लगा मैं फंसने वाला हूँ, सो मैंने उसी के लहजे में उस से कहा कि यार हर कोई समाज सुधारक नही हो सकता है अगर ऐसा होता तो समाज को सुधारने की जरुरत ही नही होती । मेरे दोस्त ने मुझसे तभी शिघ्रता से पुछा, तेरी गर्लफ्रेंड का क्या हाल है, तुम्हारी..........
मेरे चेहरे पे खामोशी छा गई । मुझे लगा मैं उस रेगिस्तान में हुँ जहॉ आँधी ने अचानक दम तोड़ दिया हो । और कह रहा हो “पत्थर के सनम तुझे मैंने मोहब्बत का खुदा माना” ।
तभी मेरे दोस्त ने कहा, यार तु तो सच्च में इमोशनल हो गया । मुझे पता है तेरे दिल की हालत “और इस दिल में क्या रखा है तेरा ही प्यार छुपा रखा है, चीर के देखे दिल मेरा तो तेरा ही नाम छुपा रखा है” ।
छुपाये रख अपने प्यार को, साले तुझे पता नही आज की लड़कियां दिल चीर के देखने नही आती है । उन्हें तो बस “दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिए बस एक दफा़ मेरा कहा मान लीजिए” ।
और लड़की पटाने का यह सबसे Simple तरिका है । एक दफा लड़कियों का कहना मान लो......फिर वो तुम्हारी.........समझे ......
मैं अपने दोस्त की बातों से ज़रा प्रभावित हो रहा था और मुझसे रहा नही गया । मैं उससे पुछ बैढ़ा कैसे कर पाता है ये सब ...... । इसका जबाब उसने बड़ा सटीक दिया । सब तुम्हारी कृपा है । मैंने कहा मेरी कृपा है.....तो उसने कहा तुम्हारी......मतलब मीडिया की......
मीडिया ने ही सपना दिखाया कर “लो दूनिया मुट्ठी में” मीडिया की वज़ह से ही आज “थींक हट के” है मेरी । मीडिया ने ही डेयरिंग बनाया क्योकि “डर के आगे जीत है” । मीडिया ही करता है “सीधी बात नो बकवास” । मीडिया ने ही मिंटोस लाइफ जीना सिखाया है जहाँ ये नही सोचा जाता है कि मैं कॉलेज में आ गया और अभी तक एक भी लड़की को नही पटा सका, जहाँ ये सोचा जाता है कि इतनी सारी लड़कियां कॉलेज में है और कोई भी मुझे नही पटा सकी । मीडिया ही आइडिया को तवज्जु देती है क्योकि “एक आइडिया जो बदल दे आपकी दूनिया” । कभी कहती है “पास आओ पास आओ” तो कभी एक ऐसी असंतुष्टि पैदा करती है जो “ये दिल मागें मोर” का रट्ट लगाये रहती है ।
मैं अपने दोस्त के हर नजरिये को सुन रहा था किस तरह से वो विज्ञापन के श्लोगनो को भी प्यार करने के लिए उत्तरदायी मानता है ।
मैं अपने ऐसे दोस्तों का परिचय तो करा दूं, जो इस सिद्धांत के वाहक हैं
राजेश रौशन, सोफ्टवेयर इंजीनियर हैं लेकिन प्यार इनका मुख्य विषय है ।
अभिनव अभि, पत्रकारिता कर रहें हैं लेकिन अपने नाम के अनुरुप प्यार में भी नव अभिनव करना इनका शौख़ है ।
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