काफी कुछ खत्म हो गया
इस बीते हुए साल मे
न चाहते हुए भी,
मै हु आज इस हल में
ये आँसु ये तनहाई
अमानत है मेरी
क्यूकि मै खुद बिखर गया ,
एक अनजाने से ख्याल में
काफी कुछ खत्म हो गया
इस बीते हुए साल में
न चाहते हुए भी,
मै हु आज इस हल में
ये माना मैंने कि नया साल आएगा
क्या फर्क, लेकिन वो भी पुराना पर जायेगा
फिर आने वाले नाये साल का इंतजार होगा
और ये सफ़र तो यू ही बरक़रार होगा
मै सोचता हु ......
इन्ही बीते हुए सालो से तो सभी की जिन्दगी बनती है
ये मेरे बीते हुए साल , ये मेरे बीते हुए लम्हें तेरा मुझपे अहसान तो रहेगा
हर एक पल तुम मुझसे दूर होते हुए जाओगे
मगर तुम्हारी दी हुए याद ऐसे में मेरे पास तो रहेगा
कि अब तेरे हर वक्त का पहचान तो रहेगा
है कहानी बन गयी मेरे इस हल की
फिर लिखूंगा दास्ताँ मैं नाये साल की
कोई समझे या ना समझे
मैं समझने का कोशिश करूँगा समय की हर चल की
काफी कुछ खत्म हो गया
इस बीते हुए साल मे
न चाहते हुए भी,
मै हु आज इस हल में
ये आँसु ये तनहाई
अमानत है मेरी
क्यूकि मै खुद बिखर गया ,
एक अनजाने से ख्याल में
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