Tuesday, 12 January 2010

शिक्षा

एक भारतीय नगरिक होने का अधिकार इस देश के बच्चे को जन्म के साथ मिलता है / और १८ वर्ष की उर्म में उसे वयस्क धोषित कर संविधान में लिखे गये सभी अधिकारों का उत्तराधिकारी भी बना दिया जाता है / इस नविन उर्म मे जब उसे वयस्क धोषित किया जाता है तो उसे इस देश के लोकतान्त्रिक व्यवस्था को समझने के लिए शिक्षा की आवश्यकता महशुस होती है / परन्तु शिक्षा उससे कोशों दूर होता है / (साक्षरता , शिक्षा का पैमाना नहीं होता है ) महानगरो के नवयुवक अपवाद स्वरूप हैं / अब ऐसें में प्रश्न यह उठता है की शिक्षा के स्तर को उठाने के लिए किसी प्रयोग की आवस्यकता है क्या ? तो जबाब बिलकुल हाँ होगा / आज पूरी दुनिया वैश्विकरण की दौर से गुजर रही है और हमारे देश मे अभी तक शिक्षा को साक्षर बनाने का कुंजी माना जा रहा है / जबकि शिक्षा सिर्फ साक्षर बनाने की किंजी मात्र नहीं है वरन यह मनुष्य के जीवन स्तर सुधारने की संस्था है /
विकाशील राष्ट्र की उपाधि मिलने के बाद से भारतीय किशोरों के लिए शिक्षा सबसे अहम हैं /
जिस तरह पश्चिम के देश ने निरंतर अपने शिक्षा शैली को बदला है वह उनके जीवन स्तर को देखने से साफ स्पस्ट हो जाता है / बात बिलकुल साफ है , इस देश को भी तकनिकी शिक्षा की आवश्यकता है / तकनिकी शिक्षा की शुरुआत हमें माध्यमिक विद्यालयों से करना होगा और इस तकनिकी शिक्षा का आधार कंप्यूटर को बनाना होगा / इस तरह से इंटर विद्यालय तक आते -आते हमरे पास कम से कम ऐसें प्रोग्रम्मेर ,डेवलोपोर, डिजाईनर,आधि हो जायेंगे जो इस गओबल मार्केट मे भी अपने को स्थिर कर पाने में सक्षम होंगे /और इस तरह इन किशोरों के मदद से हम विकसित राष्ट्र के सपने को भी सच कर पाएंगे /
बरहहल जिस तरह से शिक्षा पर राजनीति हो रही है और सिर्फ बहस तक ही सिमटी हुई है /सरकार को इस नव दशक में शिक्षा के सभी खामियों को दूर करने के लिए एवं शिक्षा में प्रयोग के लिए मिशन के तहत कार्य करना होगा /
विकाशील राष्ट्र की उपाधि मिलने के बाद से भारतीय किशोरों के लिए शिक्षा सबसे अहम हैं /

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