Saturday, 19 June 2010

रावण को बिहार नसीब नही...

बिहार की राजनीति को पुरा भारत जानता है । केन्द्रीय सरकार खासकर बिहार के राजनीति को बड़े नजदीक से लेती है । आजादी के 6 दशक से लेकर अभि तक बिहार के राजनीति को केन्द्र की राजनीति से जोड़कर देखा जाता रहा है । ऐसा हो भी क्यूं ना..इस राज्य को राजनीति का आखाड़ा माना जाता है । लेकिन क्या वज़ह ऐसा रहा कि राजनीति में अपना स्थान रखने वाला बिहार कभी किसी के लिए बाजार नही बन सका । बाजार की दूर्दशा ने ही बिहार को कभी कॉरपोरेट राज्य नही बनने दिया । एक जमाने में जब झारखंड साथ हुआ करता था तो बिहार के बाजार को सिर्फ यह कह कर नाकार दिया जाता था कि कारखाना, मजदुरी के लिए होती है और मजदूर कभी बाजार नही बना सकते । शायद यही धारणा अभि तक बनी हुइ । बिहार के लोगो को रावण देखने का मौका नही मिल पाया है,या यूं कहे बिहार के लोगो को रावण दिखाना ही नही था । इसकी वजह साफ है बाजार ... बिहार में मनीरत्नम ने रावण रीलीज नही की....कोई जानना नही चाहा की ऐसा मनीरत्नम ने क्यूं किया । लेकिन एक बात जो निकल के सामने आई वोहै बिहार में सिनेमा का बाजार .... सभी जानते है कि बिहार और उत्तर प्रदेश में ही सबसे ज्यादा सिनेमा देखी जाती है । ऐसे में बिहार में रावण का रीलीज ना होना बिहार के सिनेमा घर और वहां के टिकट के रेट से संबंध रखता है । 10,20,या 30 रुपये में बिहार में आसानी से कोई भी नई सिनेमा को रीलीज के दिन ही सिनेमाघर में देखा जा सकता है । मनीरत्नम के लिहाज से रावण को 150 से 1500 वाले दर्शक की दरकार थी । जो उन्हें बिहार में नही मिल सकता था । इसलिए रावण को बिहार में रीलीज नही की गई । लेकिन जिस तरह से रावण को मुंह की खानी पड़ी उससे तो अब बिहार के वो दर्शक भी नही मिलेगें जिसे मनीरत्नम बाजार की श्रेणी में गिनते ही नही ।

1 comment:

  1. जिन्दा लोगों की तलाश!
    मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!!


    काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग मिल सके तो भी कम नहीं होगा।
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    सच में इस देश को जिन्दा लोगों की तलाश है। सागर की तलाश में हम सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है। सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे।

    हमें ऐसे जिन्दा लोगों की तलाश हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो, लेकिन इस जज्बे की आग से अपने आपको जलने से बचाने की समझ भी हो, क्योंकि जोश में भगत सिंह ने यही नासमझी की थी। जिसका दुःख आने वाली पीढियों को सदैव सताता रहेगा। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है।

    इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है।

    अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं।

    आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना।

    शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल-

    सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! अब हम स्वयं से पूछें कि-हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे?

    जो भी व्यक्ति इस जनान्दोलन से जुडना चाहें, उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्ति हेतु लिखें :-

    (सीधे नहीं जुड़ सकने वाले मित्रजन भ्रष्टाचार एवं अत्याचार से बचाव तथा निवारण हेतु उपयोगी कानूनी जानकारी/सुझाव भेज कर सहयोग कर सकते हैं)

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
    राष्ट्रीय अध्यक्ष
    भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
    7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
    फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666

    E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in

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