हर सुबह का उगता सूरज एक नयी उम्मीद लेके आता है..लेकिन हर शाम के ढ़लते सूरज के साथ ये उम्मीदें तोड़ देती है । इंतज़ार है अब बस एक रौशन सुबह की...
Tuesday, 22 May 2012
Wednesday, 16 May 2012
चांद के हमसफर रात
रात की चक्काचौंध से बेखबर था मैं...
क्योंकि सिर्फ उजालों की बात होती थी...
अंधेरे को तो दिेये-बिजली से मिटाता रहा हूं...
कभी टिमटिमाते सितारों को देखने की कोशिश नहीं की ...
आज जब रात की पनाह में हूं....
तो इसके रोशनी, इसके मोहब्बत को जाना हूं....
आज इस रात में रौशन है, एक ख्वाब एक सपना...
जो सिर्फ रात के सहारे पल रहा है...
सुबह ना जाने क्या होगा...
अज़िब हलचल है...
रात के इस सादापन में ...
जहां भूलाया तो सब जा सकता है...
पर ख्वाब का गुल, इसी के दरिचे में उगते हैं...
ऐ चांद के हमसफर रात...
अपनी चक्काचौंध से यूंहीं बेखबर रख मुझे...
क्योंकि मुक्कमल शुकूंन का वजूद है तु...
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