Saturday, 6 December 2014

प्रधानमंत्री की ईष्य़ा



लोकतंत्र पर आंतकवादियों की निर्लज्ज हमला...और इस हमले में शहीद हुए झारखंड के लाल संकल्प की शहादत को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रधांजलि देते हुए हजारीबाग में अपने भाषण का आगाज किया...मोदी ने झारखंड की वीरता को याद दिलाते हुए बिरसा मुंडा को याद किया तो वहीं..मोदी जनता से शिकायक करने से भी नहीं चुके...उन्होंने कहा कि हमें आपसे शिकायत है...लेकिन इस शिकायत में प्यार है...वहीं पीएम मोदी बोलते बोलते अपने दिल की ईष्या भी बोल गए...उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जब वो गुजरात में थे...तो उन्हें झारखंड से ईष्या होता था...गुजरात के हिस्से में रेगिस्तान है...जबकि झारखंड के पास अपार प्राकृतिक संपदा...भले ही मोदी कभी झारखंड से ईष्या रखते थे...
लेकिन आज वो प्रधानमंत्री है...उन्हें अपने मन की बात को जुबान पर नहीं लाना चाहिए था..उनके बड़बोलेपन है कि लोग उनके ईष्या में भी लगाव ढूढ़ने में लगे हैं...लेकिन आज वही मोदी झारखंड से उम्मीद पाले हुए है...वैसी उम्मीद जिसमें गठबंधन की मजबूरियां न हो...क्योंकि मोदी को लगता है कि मिली जुली सरकार महंगे होते है...और उसके सौदे जनता को भुगतना पड़ता है...लेकिन प्रधानमंत्री जी देश जानना चाहता है कि ढाई साल पहले जिस सत्ता पर बीजेपी कायम थी...वो भी गठबंधन की सरकार थी...और मौजूदा समय में महाराष्ट्र में भी आप गठबंधन में ही सरकार चला रहे हैं...बहरहाल जिस तरह से हजारीबाग में पीएम मोदी उत्साह से लवरेज लग रहे थे...उससे तो लगता है कि मोदी जनता के मुड को भांप चुके हैं...लेकिन ये जनता है...जिसे समझना आसां नहीं होता...बहरहाल चुनावों के फैसले की तारीख तय है...लिहाजा इंतजार है जनता की फैसले की....

मस्जिद मुद्दा और मुद्दई

बाबरी मस्जिद मुकदमे के पैरोकार और मुद्दई हाशिम अंसारी ने रामलला को आजाद देखने की ख्वाहिस क्या जाहिर की.....राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई...हाशिम अंसारी के बयान पर विपक्ष रणनीति तैयार करता उससे पहले ही अंसारी ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ कर सभी को चौंका दिया...अंसारी ने कहा कि मोदी सियासी फायदा उठाने वाले नहीं हैं... वे कौम की मदद करने वाला अच्छे इंसान हैं....वहीं मुद्दई हाशिम अंसारी के बायन पर यूपी के कैबिनेट मंत्री आजम खान आक्रमक हो गए हैं...उन्होंने अंसारी पर तंज कसते हुए कहा कि हासिम अंसारी की उम्र हो गई है...वो बीमार चल रहे हैं...ये वो नहीं बल्कि उनका फस्ट्रेशन बोल रहा है...92 वर्षीय हाशिम अंसारी पिछले 65 साल से बाबरी मस्जिद का मुकदमा लड़ रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस मुकदमे में वह मुस्लिम पक्ष की तरफ से सबसे दमदार पैरोकार माने जाते हैं।
1949 में जब विवादित स्थल से मूर्तियां बरामद हुई थीं, उस समय जिन लोगों को अरेस्ट किया गया था, उनमें हाशिम भी थे। 1961 में जब वक्फ बोर्ड ने मुकदमा दायर किया था, उसमें भी हाशिम मुद्दई बनाए गए थे। लिहाजा आजम खान को लगता है कि जिस मुद्दे के सहारे उनकी राजनीति चलती रही है...वो उनसे छिनता जा रहा है...और इसलिए ही वो कह रहे हैं कि अगर सभी कोई भी इस मुद्दे से विद ड्रॉल कर लेता है तब भी मुकदमा चलेगा.. राजनीतिक पार्टियां विवादित ढ़ांचे के सहारे सियासी रोटियां सेकती रही है......लेकिन सवाल अभी मजूं बना हुआ है कि क्या रामलला आजाद हो पाएगा? क्या वाकई में विवादित ढ़ांचा को लेकर आम सहमति बन पाएगी ? क्या कोर्ट कचहरी के बाहर दोनों पक्षों में रजामंदी बन पाएगी ? बहरहाल जिस तरह से सितायतदां हमेशा विवादित ढ़ाचा को मुद्दा का शक्ल देते रहे हैं उससे तो लगता है कि मुद्दों का ये मलवा इतनी जल्दी साफ होने वाला है ।