Friday, 2 April 2010

कलम

-->
दोस्त की जब हो कमी
जब कोई न साथ दे
पल महीना सा लगे
और महीना चुभने लगे
छोड़ो सब चिंतन मनन
लो मुझे अपना बना
मैं तेरा बचपन का साथी
लोग मुझको कहते हैं कलम
आँसुओं के शब्द हैं मुझसे
खुशियों के लब्ज़ हैं मुझसे
तन्हाईयों में भी साथ तेरे
न छोड़ू कभी तुझको अकेले
लो मुझे अपना बना
मैं तेरा बचपन का साथी
लोग मुझको कहते हैं कलम
मुझसे ही शोहरत मिलेगी
शान, शौकत, इज्ज़त मिलेगी
मेरा साथ जिसने लिया
उसे सब कुछ मैंने दिया
लो मुझे अपना बना
मैं तेरा बचपन का साथी
लोग मुझको कहते हैं कलम

No comments:

Post a Comment