ये ख्वाब यूं टुटेगा कभी
यकीं ना था
तेरे मेरे बीच
यूं दरमियां होगा कभी
यकीं ना था
वक्त है कि बस...
चला जा रहा है
और याद का यूं...
सिलसिला होगा
कभी यकीं ना था...
मैं मजबूर हूं
या फिर...
ये मोहब्बत है मेरी
बेवफा होके भी
जफ़ा का उम्मीद करता हूं
कभी यकीं ना था
अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्द दिए हैं बधाई।
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