इस दिल की आवारगी ना पूछों
उनकी ऑखों के इनायत ब्यां करने होगें
रौशन हुआ ये नहीं यूहीं
उनकी ऑखों के मदहोशी जाया करने होगें
इस दिल की आवरगी ना पूछों
उनकी ऑखों के इनायत ब्यां करने होगें
मुकम्मल जिन्दगी की ना चाह थी
ना ही ख्वाहिशों का कोई दरिचा
ब्यार-ए-इश्क उनकी ऑखों से यूं चला
आवरे दिल में भी
मोहब्बत का धूआं सुगलने लगा
सुलगते इस जलन की बेकरारी ना पूछों
महकते उनके आंचल को ब्यार बनने होगें
इस दिल की आवरगी ना पूछों
उनकी ऑखों के इनायत ब्यां करने होगें
अज़ीब कसमाकस है
प्यारी सी तड़प और दर्द के बीच
जो रहता रात-दिन है
पर समझ पाता नहीं हूं मैं
इस नासमझी का मतलब ना पूछों
उनकी ऑखों के हया होगें ये
इस दिल की आवारगी ना पूछों
उनकी ऑखों के इनायत ब्यां करने होगें
यूहीं इत्तेफ़ाक फिर अचानक मिल जाये वो
कि रौशन चांद कर देगा उन ऑखों को
नया मौसम वो होगा गुलशन की गवाही में
सजी-सवरी फ़िज़ा होगी, हवा की बाहों से
मगर ये आलम ना पूछों
उनकी ऑखों के इंतजार को जवां करने होगें
इस दिल की आवारगी ना पूछों
उनकी ऑखों के इनायत ब्यां करने होगें
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