ये तन्हाई कितनी प्यारी है
शायद मेरे महबूब से भी ज्यादा
ये ख़ामोशी कितना कुछ कहता है
शायद मेरा महबूब भी जो ना कह सका
इस आवारगी में भी कितना सुकून है
शायद सादगी जो ना कर सका
ये मुस्कुराहट तो वो नही
जिसके खिलते ही लव गुलाब बनते थे
ये आह्ट तो वो नही
जिसके सुनते ही दिल में चिराग चलते थे
ये तस्वीर बनावटी है
या फिर ...
बनावटीपन ही तम्हारी छवि है
शायद मेरे महबूब से भी ज्यादा
ये ख़ामोशी कितना कुछ कहता है
शायद मेरा महबूब भी जो ना कह सका
इस आवारगी में भी कितना सुकून है
शायद सादगी जो ना कर सका
ये मुस्कुराहट तो वो नही
जिसके खिलते ही लव गुलाब बनते थे
ये आह्ट तो वो नही
जिसके सुनते ही दिल में चिराग चलते थे
ये तस्वीर बनावटी है
या फिर ...
बनावटीपन ही तम्हारी छवि है
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