रौशन कुमार
लब्जों से तस्वीर बनाने को जी चाहता है, एक ऐसी तस्वीर जिसमें होठों के मुस्कान
पर जज्बातों के एहसास रख दुं, उम्मिदों का बेपनाह लेप चढ़ाऊं तुम्हारी उंगलियों पर
और रंग बादलों का लेके निले आसमान की तरह तुम्हे सजाऊं । तुम ताजा सुबह और अलसाये
शाम की तरह दिखो और मैं सारे कायनात से कह सकूं कि तस्वीरों के जहां में भी मेरा
इश्क कितना रौशन है ।
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