लापरवाह हवाओं से
दिल की बातें बतियाना
लगता तो पागल जैसा है
पर
इन बातों से मुझे क्या लेना
झुल्फों के निचे का बादल
होटों से उसका टक्कराना
सुर्ख़ मुलायम गालों को
चुपके से छुके आना
हवा सुनाती है मुझको
प्यार भरा ये अफ़साना
धूप को आंचल से ढ़कती है
शर्म से उसका मुस्काना
ये सब अदा है जानम का
हवा बताती है मुझसे
लापरवाह हवाओं से
दिल की बातें बतियाना
मौसम संग संवरती है वो
चांद सा अंग निखरती है वो
जूगनु की रौशन हो जैसे
तितली पर मरती है वो
लापरवाह हवाओं से
दिल की बातें बतियाना
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