Saturday, 22 June 2013

लापरवाह हवाओं से


लापरवाह हवाओं से
दिल की बातें बतियाना
लगता तो पागल जैसा है
पर  इन बातों से मुझे क्या लेना

झुल्फों के निचे का बादल
होटों से उसका टक्कराना
सुर्ख़ मुलायम गालों को
चुपके से छुके आना
हवा सुनाती है मुझको
प्यार भरा ये अफ़साना

धूप को आंचल से ढ़कती है
शर्म से उसका मुस्काना
ये सब अदा है जानम का
हवा बताती है मुझसे

लापरवाह हवाओं से
दिल की बातें बतियाना

मौसम संग संवरती है वो
चांद सा अंग निखरती है वो
जूगनु की रौशन हो जैसे
तितली पर मरती है वो

लापरवाह हवाओं से
दिल की बातें बतियाना



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