मेरे गरीब दिल का कोई संविधान नहीं है
इसका ये मतलब नहीं
कि इसकी इच्छाओं का कोई संरक्षक नहीं
मैं बिना शपथ लिए हुए ही
अपने दिल का संविधान रचता हूं
मुझे संवेदनाओं के मत नहीं चाहिए
जिसके बहुमत से
असंवेदनाओं की बाढ़ आ जाए
इसे बाजारु और बनावटीपन स्नेह से नफरत है
इसलिए नहीं कि...
इसका भाव लगाया जा सकता है
बल्कि इसलिए...
क्योंकि इससे स्नेह का भ्रष्टाचार फैलता
है
मर्यादाओं की सीमाएं टूटती है
और कानून की मांग बढ़ती है
कानून का मतलब है...
संविधान...
जिसमें धाराओं और अनुच्छेदों का विस्तार
हो
और मैं
स्नेह का भ्रष्टाचार
असंवेदनाओं की बाढ़
और कई तरह की अनियमिताओं को
अपने दिल पर बर्दाश्त नहीं कर सकता
भले ही गरीबी कितनी क्यूं ना हो
इसलिए
मेरे दिल का कोई संविधान नहीं है ।

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