Saturday, 4 January 2014

बेवफाई बेहतर है बेइमानी से

नये शहर में रौशन आया तो लगा नया सवेरा होगा....लेकिन ये तो वही सुबह है । हल्की-हल्की किरणों के साथ जागता सुरज....और मध्यम होते शाम में रात की आगोश में सोता सुरज....रात भी वही है, चॉद भी वही है, सितारों की चमक और ख्वाबों का जहां भी वही है । फिर क्यूं इतना बनावटीपन है इस शहर में ?
मैं बात कर रहा हुं दिल्ली की । दिल्ली में बहुत लोगों से जान पहचान हुई । कुछ तो कॉलेज में और कुछ कॉलेज से बाहर । कोई खास बनना चाहा और शायद इसमें वो सफल भी हुआ... लेकिन खास का मतलब यहां सिर्फ उसके लिए जुगाड़ होता है । जुगाड़ से मतलब है रिश्तों में मुनाफे का हिसाब । ये मुनाफा कई तरह के होते हैं । अगर आप इस तरह के मुनाफे से वाकिफ़ हैं तो शायद मेरे कहने का मतलब समझ पा रहे होंगें । खैर रिश्तों में हिसाब-किताब करना ही बेइमानी है ।
शायद यही वज़ह है कि बेवफाई बेहतर है बेइमानी से....और हम तो ये भी मानते हैं कि “ अच्छा हुआ सनम कि...मैं बेवफा हो गया, वफादार तो कुत्ते हुआ करते हैं ’’
कितने वफादार कुत्ते को तो मैंने भी देखा है । लेकिन क्या भौंकने भर से वफादारी होती है ? नही ना.........
क्षणिक भर का सुख बहुत दुखदायी होता है । ये जानते हुए भी क्षण भंगुर संसार में रम जाना कितना आश्चर्यजनक है । नये शहर में पुरानी बातें अजीब लगती है । पर हमें ये मान के चलना चाहिए कि शहर कोई सा भी हो मनुष्य का स्वभाव एक सा ही होता है । जिंदगी के राह चलते-चलते एक रौशन ख्वाब से टकरा गया था मैं । मौजो के इस सफर में उफान सा छा जाता है, जब उस हंसी पल में गोते लगाता हुं । सफर के इस हकीकत को अनचाहे ही कोई समझा गया था मुझे । शायद यकीं था उसे खुद पे इतना मेरा सफर था लम्बा जितना ।

“उजाले अपनी यादों का साथ ही रहने देना
जाने किस गली में जिंदगी की शाम ढ़ल जाए”


ये अल्फ़ाज नही मुकमल्ल एक कहानी है । वो रौशन ख़्वाब यही अल्फ़ाज बनके मेरे ज़ेहन में आज भी अभिनव है । लेकिन जिंदगी के इस अनजाने डगर में, मैं यूहीं चला जा रहा हूं । ना रास्तों का इल्म है, ना मंजील की ख़बर । गुमनामी के इस जहां में हस्तें-मुस्कुरातें, ठोकर खाते, गिरते-सम्भलतें खुद की परछाईं का पिछा किये जा रहा हुं । डर है कहीं जिंदगी के इस दौड़ में रफ्तार से समझोता ना करना पड़ जाये । फिर भी यकीं है कि इस अभिनव जगत में ये रौशन भी कभी मील का पत्थर साबित होगा ।


“अकेला चला था....अकेला चलूंगा
जिंदगी के सहारे.....ना दो साथ मेरा
कभी तो मैं....खुद को साबित करुंगा
सहज़ मिल सके....वो नही लक्ष्य मेरा
बहुत दूर है मेरे....निशां का सवेरा
अगर थक गये हो....तो तुम लौट जाओ
गगन के सितारे....देगें साथ मेरा ”

ईक बात कहूं तुमसे...

ये कैसी कसक है कि उनकी याद दूर होती नहीं

हर बार मुझे उनसे कुछ कहना होता था

सकुचा के बातों बात में हिम्मत जुटा के

मैं कहता
...
ईक बात कहूं तुमसे...

वो लव्ज़ों को ओठों पे लाके

हां में सिर हिलाती

उसकी आंखें, मेरे चेहरे के हर भंगिमा को

पढ़ने का कोशिश करता

और मैं अनजुमन ही कहता...

कुछ नहीं.
..
शायद उसे भी मालुम था

मेरे ‘कुछ नही’ का मतलब

तभी तो उसके हां में सर हिलाने

में उत्साह होता था

अभिनव की नई छटा और

उत्सव का नया रंग होता था

क्या वाकई उसे ‘कुछ नही’ का मतलब पता था ...

या यूहीं उनकी नज़दिकियों ने

मेरे दिल के साथ है फ़रेब किया

Thursday, 2 January 2014

विश्वास में 'आप' है



विधानसभा में विश्वासमत प्रस्ताव में आम आदमी पार्टी ने 32 के मुकाबले 37 मतो से विश्वासमत हासिल किया है...आप के 28 विधायकों के साथ-साथ कांग्रेस के 8 और जेडीयू के एक विधायक भी आप के समर्थन में वोट डाले...आम आदमी पार्टी ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया ...कांग्रेस और जेडीयू के समर्थन से आप को बहुमत हासिल हुआ...इससे पहले दिल्लीज सरकार के विश्वारस मत प्रस्ता व पर विधानसभा में गर्मागर्म बहस हुआ...दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विश्वास मत प्रस्ताव भाषण में आम आदमी के परिभाषा से अपने भाषण की शुरुआत करते हैं..केजरीवाल राजनीति में अपराधिकरण और भ्रष्टाचार की बात करते हुए अपने और अपने विधायकों को राजनीति में आने की मजबूरियां गिनाई....कहा कि आम आदमी की समस्याओं के समाधान के किसी खास पार्टी की जिम्मेदारी नहीं बनती है..बल्कि यह एक सामुहिक जिम्मेदारी होनी चाहिए...इसमें आप...बीजेपी...कांग्रेस जैसी राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए... वहीं 2 :20 बजे बीजेपी के नेता हर्षवर्धन सरकार के विश्वास मत प्रस्ताव पर बोलने आये और जब वह बोलने पर आये तो 45 मिनट तक बोलते रहे...हर्षवर्धन अपने भाषण में आप की सरकार पर सिलसिलेवार आरोपों लगाए..बहरहाल मतदान के बाद सरकार ने विश्वासमत हासिल कर लिया है...लेकिन विपक्ष के पास 15 दिन के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाने का विकल्प अभी खुला हुआ है...पर केजरीवाल को समर्थन करने की कांग्रेस की अपनी मजबूरी है...फिलहाल केजरीवाल सरकार के पास बहुमत का जादुई आकड़ा है...