अपनी गेसुओं से लड़ती रहती हैं वो
लापरवाह तो नहीं....
पर जब भी देखूं, बड़ी रौशन लगती हैं वो
उनकी जुल्फों से जाके ऐ हवा तू ही कह दे
है खबर उनको भी...
फिर क्यों बेखबर सी रहती हैं वो
ये माना कि सितम का सिलसिला
उनके हुस्न और जुल्फों के बीच है
पर ये दिल सितम सहता है...
ये क्यों नहीं जानती हैं वो
अख्तियार सही न सही तेरा
गेसुओं के खुलने बिगड़ने पर
पर लुट सा जाता है रौशन
जब वो जुल्फों से लड़ती झगड़ती हैं
हो यकीन तुझको भले न ऐ जुल्फ
कुछ बेपरवाह, कुछ तुमसे खासमखास जुड़ी हैं वो
वजह यही है कि जब भी मैं...
उनकी जुल्फों को संवारने की कोशिश करुं तो
कुछ उनकी आंखें, कुछ आइना से हया उतार लेती हैं वो
उनकी फितरत पर शक है रौशन
बार-बार खुलती है, फिर भी बेमिसाल लगती हैं वो
दो चार गेसुओं के लट ऐसे भी हैं रौशन
जो बार-बार उनकी गालोें को चूमती हैं
फिर भी बेख्याल रहती हैं वो
इत्तेफाकन नहीं मेरी नजरों में उनकी जुल्फें आ बसी है
ये तो दिल है मेरा जो जानना चाहता है
जुल्फों पर इनायत इतना, रौशन से क्यों भागती हैं वो
अपनी गेसुओं से लड़ती रहती हैं वो
लापरवाह तो नहीं....
पर जब भी देखूं, बड़ी रौशन लगती हैं वो
लापरवाह तो नहीं....
पर जब भी देखूं, बड़ी रौशन लगती हैं वो
उनकी जुल्फों से जाके ऐ हवा तू ही कह दे
है खबर उनको भी...
फिर क्यों बेखबर सी रहती हैं वो
ये माना कि सितम का सिलसिला
उनके हुस्न और जुल्फों के बीच है
पर ये दिल सितम सहता है...
ये क्यों नहीं जानती हैं वो
अख्तियार सही न सही तेरा
गेसुओं के खुलने बिगड़ने पर
पर लुट सा जाता है रौशन
जब वो जुल्फों से लड़ती झगड़ती हैं
हो यकीन तुझको भले न ऐ जुल्फ
कुछ बेपरवाह, कुछ तुमसे खासमखास जुड़ी हैं वो
वजह यही है कि जब भी मैं...
उनकी जुल्फों को संवारने की कोशिश करुं तो
कुछ उनकी आंखें, कुछ आइना से हया उतार लेती हैं वो
उनकी फितरत पर शक है रौशन
बार-बार खुलती है, फिर भी बेमिसाल लगती हैं वो
दो चार गेसुओं के लट ऐसे भी हैं रौशन
जो बार-बार उनकी गालोें को चूमती हैं
फिर भी बेख्याल रहती हैं वो
इत्तेफाकन नहीं मेरी नजरों में उनकी जुल्फें आ बसी है
ये तो दिल है मेरा जो जानना चाहता है
जुल्फों पर इनायत इतना, रौशन से क्यों भागती हैं वो
अपनी गेसुओं से लड़ती रहती हैं वो
लापरवाह तो नहीं....
पर जब भी देखूं, बड़ी रौशन लगती हैं वो
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