एक राष्ट्र का जन्म
44 सालों पहले की बात है...जब ढाका में पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण किया था।...पूर्वी पाकिस्तान के कमांडर जनरल नियाजी को जब आत्मसमर्पण की शर्तें पढ़कर
सुनाई जा रही थी... तब उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में अपनी
ओर देख रहे वरिष्ठ भारतीय सैन्य अधिकारी से कहा था...कौन कह रहा
है कि मैं हथियार डाल रहा हूं...और ये उनके आत्मसमर्पण से पहले
आखिरी शब्द थे... उसके बाद जो हुआ, वो समूची
दुनिया जानती है...भारत के सामने पाकिस्तान को घुटना टेकना पड़ा...और उस एतेहासिक दिन को भारत कभी नहीं भुला सकता है...

आज 16 दिसंबर है...आज के दिन पूरा भारत और सेना विजय दिवस मनाती
है.... ये दिन भारत के इतिहास में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन अमेरिका
सहित दूसरे देशों की ताकत के घमंड में चूर... पाकिस्तान का हर इरादा ध्वस्त कर
दिया गया था.... और बांग्लादेश के नाम से नए देश का उदय हुआ था. भारत और पाकिस्तान
के बीच हुआ 1971 का युद्ध भारतीय इतिहास
में हमेशा अमर रहेगा....लगभग दो हफ्ते ...3 से 16 दिसंबर तक चले इस युद्ध के बाद दुनिया के पटल पर
बांग्लादेश नामक नए मुल्क का उदय हुआ.... भारतीय जाबांजों के साहस और जीवटता के
आगे पाकिस्तानी सेना ने घुटने टेक दिए थे.... इसे भारत की अब तक की सबसे बड़ी
युद्ध विजय कहा जाता है....और इसलिए 16 दिसंबर को भारत विजय दिवस मनाता है....25 मार्च, 1971 को पाकिस्तान के सैनिक
तानाशाह याहिया खां ने पूर्वी पाकिस्तान की जन भावनाओं को सैन्य ताकत से कुचलने का
आदेश दिया.... पाकिस्तानी सेना ने बांग्लादेश के बड़े नेता शेख मुजीबुर्रहमान को
गिरफ्तार कर दमन चक्र शुरू कर दिया....
इधर परेशान और आहत पूर्वी पाकिस्तान के लोगों का हिंदुस्तान आने का सिलसिला
शुरू हुआ....पाकिस्तानी सेना के दमन चक्र बढ़ने के बाद भारत पर दबाव पड़ने लगा कि
वह पूर्वी पाकिस्तान में सैन्य हस्तक्षेप करे.... तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री
इंदिरा गांधी ने इस मसले पर थलसेना अध्यक्ष जनरल मानकेशॉ से राय मांगी....मानेक शॉ
ने इंदिरा गांधी को साफ कर दिया कि वह पूरी तैयारी के साथ ही जंग के मैदान में
उतरना चाहेंगे...3 दिसंबर 1971 को अचानक पाकिस्तानी वायुसेना ने भारतीय सीमा पर पठानकोट, श्रीनगर, अमृतसर, जोधपुर और आगरा के सैनिक हवाई अड्डों पर बम गिराने शुरू कर
दिए.... इस हमले को ऑपरेशन चंगीज् खान कहा
जाता है... कलकत्ता में जनसभा कर रहीं इंदिरा गांधी ने उसी समय दिल्ली लौटने का
फैसला किया.... मंत्रिमंडल की आपात बैठक के बाद इंदिरा गांधी ने रेडियो पर राष्ट्र
को संबोधित किया....भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध
की घोषणा कर दी और फिर शुरू हुई भारतीय सेना की अमर गाथा...पूर्व में तेजी से आगे
बढ़ते हुए भारतीय सेना ने जेसोर और खुलना पर कब्जा कर लिया.... तंगेल पर कब्जा और
पाकिस्तानी सेना के ढाका भागने वाले मार्गों को बंद करने के तुरंत बाद मानके शॉ ने
पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल नियाजी को अपना संदेश भेजकर आत्मसमर्पण करने को
कहा.... इस युद्ध में पूर्वी कमान के
स्टाफ ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल जेएफआर जैकब की भी अहम भूमिका रही....पाकिस्तान के
पास ढाका के अंदर 26 हजार 400 सैनिक थे जबकि भारत के पास सिर्फ 3000 सैनिक थे फिर भी 15 दिसंबर को पाकिस्तानी सेनापति जनरल एके नियाजी ने युद्धविराम की प्रार्थना
की.... 16 दिसंबर 1971 को 97 हजार 368 पाकिस्तानी
फौजों ने आत्मसमर्पण कर दिया. याहिया खां पूरी तरह हार मानने को बिबस हो गए. इस
तरह बांग्लादेश नामक नए देश का उदय हो गया....
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