Monday, 14 March 2016

बड़बोली सियासत !

देश को इन दिनों सुलगाने की कोशिश की जा रही है । देश में ऐसे मुद्दों को हवा दिया जा रहा है, जिससे आम लोगों के मानस पर बुरा असर पड़े और फिर ऐसे ही आम लोगों को हथियार बनाकर राजनीति की लौ जलाई जाए । देश में कई ज्वलंत मुद्दें हैं, जिन पर सियादतदां चुपी साधे हुए हैं । गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, भुखमरी, किसानों की हत्या, जैसे कई जमीनी मुद्दे हैं, जहां देश हांफ रहा है, और हमारे सियासतदांदेश को इन तमाम मुद्दों से भटकाने में मशगूल हैं । बड़बोलापन और बेतुके बयानों का मानों जैसे बहार आ गया हो । सियासतदां एक शिगूफा छोड़ते हैं, और पूरा देश उनके शिगूफा पर मंथन करने लगता है । आरोप-प्रत्यारोपों की लड़ाई शुरू हो जाती है । इतना ही नहीं, संसद में ऐसे शिगूफों पर बहस होती है, हंगामा होता है, कार्य स्थगन तक करना पड़ता है । ताजा मामला कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद से जुड़ा है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने संघ की तुलना आतंकी संगठन ISIS से की है । संघ का विरोध IS जैसे आतंकी संगठन से करने का मतलब क्या होता है ? जाहिर सी बात है, ये बीजेपी के लिए बर्दाश्त करना मुश्किल था । गुलाम नबी के इस बयान को लेकर राज्यसभा में बीजेपी सांसदों ने जमकर हंगामा किया । बीजेपी सांसद मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस से इस बयानबाजी पर माफी मांगने की मांग की । ऐसे में राज्यसभा में हंगामे के बीच गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अगर उनके भाषण में कुछ भी गलत हो तो मेरे खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव ला सकते हैं । वहीं AIMIM के नेता असुउद्दीन ओवैसी ने भी विवादित बयान दिया है । उन्होंने कहा कि मैं भारत माता की जय नहीं कहूंगा, गर्दन पर कोई छूरी रख दे तब भी नहीं कहूंगा ।  देश में पहले से ही सौहार्द्र, जाति, आरक्षण जैसे जटिल मुद्दे मुंह बांये है, और अब संघ की तुलना IS से करने का मामला तुल पकड़ रहा है । ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सियासतदां आक्रोश की बीज बो कर राजनीति की फसल को हरी-भरी रखते हैं । 

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