Saturday, 15 October 2011

चल शाम तू जा रही जिस कदर

चल शाम तू जा रही जिस कदर
मै भी अपने घर को चला
तू ढल रही जिस कदर
मै भी थक चूका

क्या तू कल फिर हसीं शाम आएगी
अपने आगोश में मौसम की जवानी और रात होने का अहसास लाएगी
अगर हाँ
तो क्यू ???
तम्हारे हिस्से का ये कैसा पल है
तम्हारी आवारगी का ये शिला है या
मोहब्बते रंजिश में तुम रोज़ आती हो
खैर ...
तम्हारे आने जाने का ये सिलसिला
मुझे उत्साहित करता है
तुम रोज़ ढल के आ सकती हो
तो क्या मै रोज़ थक के तम्हारे साथ नही जा सकता हूँ

Wednesday, 12 October 2011

तर्क करना वाजिब नहीं होगा

लोगों के आक्रोश और देश में व्याप्त धांधली का माहौल कभी भी किसी को भी
अपने आगोश में ले लेगा शायद यही वजह है की प्रशांत भूषण पिट गये और
अन्ना टीम हस्त्प्रद हैं .
नेतागण भले इस बात को यह कह कर मुकर जाये कि मेरे पास इस विषय में कोई जानकारी नहीं है
लेकिन ये वारदात उनको सचेत राजनीति करने पर मजबूर कर देगा, अन्यथा अंजाम के विषय में
तर्क करना वाजिब नहीं होगा

Monday, 13 June 2011

हमें अफ़सोस है अपने ही दिल के तानाशाही पे

तड़प की बेकरारी का अंदाजा हमने जाना है
जुबां खामोश रखके दिल को जलाना हमने जाना है


बड़ा गुमान था मुझको मेरे लूटें दिल पे भी
सनम के भूल जाने का फ़साना हमने जाना है


तहेदिल से हर जिक्र में शामिल रहें हैं वो
मगर मेरे ही जिक्र से उनका घबराना हमने जाना है


हमें अफ़सोस है अपने ही दिल के तानाशाही पे
की दिल के राज में हिटलर का मात खाना हमने जाना है

Wednesday, 8 June 2011

सत्याग्रह पर सत्ता का ग्रह


सरकार कांग्रेस की है, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह है, परन्तुनीति, तानाशाही और हिटलरशाही है। लगातार पिछले दोसालों से बाबा रामदेव भ्रष्टाचार को खत्म करने की कवायदमें जुटे थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि ये भ्रष्टाचारकांग्रेसियों के लिए ऑक्सीजन है। जिस तरह ऑक्सीजनके बगैर हमारा जीना मुश्किल है, ठीक उसी तरह भष्टाचारके बिना कांग्रेसी मठ सलामत नहीं रह सकता। शायद यहीवजह है कि बाबा के सत्याग्रह को दबाने के लिए सभी तरह के हथकंडे अपना रही है। कूटनीति का इस्तेमाल कियागया, दबाव की स्थिति बनाई गई, प्रलोभन दिया गया, लेकिन इन सब के बावजूद बाबा का सत्याग्रह पर डटे रहनादेश की जनता के लिए जागृति बम जैसा था। इसमें शोला था ही धमाका। बस एक आस थी भ्रष्टमुक्त औरस्वच्छ राष्ट्र के निर्माण का। इस जागृति बम को देश के हर कोने में फैलने देने से रोकने के लिए सत्याग्रह कोकुचलना ही सरकार की आखिरी मंशा थी। इसलिए रामलीला मैदान को रात के आखिरी पहर में रणभूमि में तब्दीलकर दिया गया। आपको याद होगा अंग्रेजों के चुंगल से देश को आजादी आधी रात को मिली थी लेकिन आधी रातको ही इन काली चमड़ी के अंग्रेजों ने लोकतंत्र को फिर से बंधक बना लिया।

देश को एक बार फिर जालियावाला बाग हत्याकांड और इमरजेंसी के दिनों का याद करना पड़ा। दिग्विजय सिंहऔर कपिल सिब्बल जैसे आला कांग्रेसी नेता बाबा को यह सलाह दे रहें हैं कि वे अपने काम से मतलब रखें। क्या वेयही सलाह अपने सरकार को नहीं दे सकते ? कपिल सिब्बल और दिग्विजय सिंह को भी तो मालूम होना चाहिएकि उनका काम देश की सेवा करना है, देश को गुमराह करना नहीं। लोकतांत्रिक तरीके से चुने गये लोग जनता केसेवक होते हैं शासक नहीं। लगातार दूसरी बार चुनी गई इस सरकार को इस बात का घमंड हो गया है कि वहजनता की माई बाप है। उनकी नीतियां जनता का खून चूसने वाली है और हांफता विपक्ष कुछ भी कर पाने कीस्थिति में नहीं है। अण्णा हजारे और स्वामी रामदेव जैसे लोग इसलिए आंदोलन के लिए आगे आये हैं। काले धनको देश का धन धोषित करने, काले धन को वापस लाने, और काले धन रखने वाले पर दण्डात्मक कार्रवाई करनेकी मांग करना राजनीति नहीं है, यह तो देशहित में की गई मांग है।

जिसतरह से स्वामी रामदेव को इन सब मांगों से दूर रहने के लिए दबाव बनाया गया और उनपर अत्याचार किएगये, लाठियां बरसाई गई और सिर्फ यह कहकर इस घटना को खारिज कर दिया गया कि बाबा योगगुरु हैं, उन्हेंराजनीति नहीं करना चाहिए। तो क्या भारतीय लोकतंत्र में संतो पर किये गये अत्याचार के लिए कानून का कोईअलग पैमाना है? क्या भारतीय लोकतंत्र में साधु-संतो को राजनीति करने की इजाजत नहीं है। कूटनीति के जनकचाणक्य भी तो एक सन्यासी थे।

अपने पापों को छुपाने के लिए ये नेता किसी भी हद तक जा सकते हैं। बाबा को अगर आरएसएस या भाजपा कासमर्थन मिल भी रहा है तो इसमें गुणाह क्या है। क्या इनका समर्थन मिल जाने से बाबा की मांगे गलत हो गईं औरगांधी के नाम की डुगडुगी लेकर देश की आबरू से खिलवाड़ करने वाले पाक साफ हो गये ?

आखिर यह कैसा दंभ। किस बात का दंभ। काग्रेस समझ जाये कि कमजोर विपक्ष ही उसकी बर्बादी का कारणबनेगा। क्योंकि इस देश के लोगों को पता चल गया है कि विपक्ष से कुछ नहीं होने वाला। वे राजघाट पर नाचने गानेके सिवा कुछ नहीं कर सकते। लोगों को घरों से बाहर निकालने की क्षमता अब उनमें नही रही। अरे भईया अवसानतो हिटलर का भी हुआ था और मुसोलनी का भी। लोकतंत्र के वेश में पोषित इस तानाशाही को खत्म करने के लिएआईए एक और तहरीर चौक बनायें। भरत के वंशजो एकबार फिर परीक्षा की घड़ी गयी है।

Wednesday, 29 September 2010

प्रेम में पाप के वजूद का होना


मानसिक विकार एक प्रकार का रोग है जिसके कई वज़ह हो सकते हैं । लेकिन प्रेम अगर विकार बन जाए तो मुश्किलात की शुरुआत मानी जा सकती है । हां लोगो को इसे समझने में जरा वक्त लगेगा लेकिन वास्तविकता से इंकार नही किया जा सकता । मैं प्रेम के उस स्वरुप का चित्रण कर रहा हुं जो वास्तव में प्रेम मात्र कहा जा सकता है । परन्तु वो किसी भी संदर्भ में प्रासंगिक नही होता है । कुछ इसी तरह के माहौल से जब मैं रु-ब-रु हुआ तो थोड़ा सा अजीब लगा । अजीब इसलिए कह रहा हूं क्योकि उस माहौल को अध्ययन-अध्यापन के लिए बनाया गया है । लेकिन प्रेम रस में लीन जोड़ें अपने आस पास चल रहे गतिविधियों से मानो कोसों दूर हों । उनके हाव भाव उनके प्रेम में पाप के वजूद को निखार कर सामने ला रहा था । या यूं कहा जा सकता है कि वो यौवन के उस स्वाद को चखना चाह रहे थे जो एक मर्यादित रिश्ता बनने के बाद बनता है । कई दफा मेरे मन में ख्याल आता रहा कि आखिर ये है क्या....आधुनिकता....लेकिन आधुनिक तो मैं भी हुं फिर एक आधुनिक दूसरे आधुनिक के व्यवहार पर मंथन कतई नही कर सकता । खैर प्रेम था तो सभी चुप थे । लेकिन इन चुप्पियों में भी कई सवाल थे जो दोनो के अलग होने के बाद पुछा जाना था । और ऐसा हुआ भी .....पहला ही सवाल था.....बेटा तेरी तो एश है, मजे ले ले....लेकिन इन सभी सवाला का जवाब उसकी हंसी थी । मानो उसने कलिंग साम्राज्य जीत लिया हो । वासना की प्राप्ति सचमुच कलिंग साम्राज्य के सिंहासन पर विजय है । परन्तु वासना के चर्मोत्कर्ष पर से लौट जाना मानसिक विकार का जनक है ।

Tuesday, 21 September 2010

दोबारा बर्बाद होना चाहते है


बर्बादी बर्बाद ना करे तो बर्बाद होना बेहतर है । शायद ये अजीब लग रहा हो मगर इसमें भी सच्चाई है । बस ध्यान यह रखना चाहिये कि आप बर्बाद होने के बाद अपने आप से किस तरह का बरताव करतें हैं । हर चीज में मजा होता है बस उस बर्बादी का आनंद लेना आना चाहिए । जिसने आप को बर्बाद करना चाहा वो तभी संतुष्ट हो पायेगा जब आप अपने आप को बर्बाद शक्स मान लेगें । और यही वो वक्त होता है जब आप अपने आप को संभाल कर के बर्बादी के जश्न को मजा के साथ मनाये । और ऐसे संभले जैसे आप दोबारा बर्बाद होना चाहते है ।

Wednesday, 8 September 2010

इश्क गर एहसास है

इश्क गर एहसास है
तो फिर तुम्हें क्यूं ना होता है
इश्क गर जज़बात है
तो फिर दिल से क्यूं ये होता है

हम तो पुरानी यादों में भी जी लें
दिल है कि देखते ही धड़क लेता है
अहसान मानो मेरे दिल का मेरे महबुब
दूर हो मेरी दुनिया से फिर भी
ख्वाब तेरा ही रात-दिन क्यूं ये संजोता है

इश्क गर एहसास है
तो फिर तुम्हें क्यूं ना होता है
इश्क गर जज़बात है
तो फिर दिल से क्यूं ये होता है