Tuesday, 21 July 2009

दोस्त जीवन सार है

दोस्त जीवन सार है
दोस्त पे ये भार है
दोस्त की दोस्ती
को करें सिंचित कभी
जब उसे न पथ मिले
मिले मंजिल कोई

दोस्त जीवन सार है
दोस्त पे ये भार है

दोस्त जीवन सार है
दोस्त पे ये भार है
दोस्त गम की बारिश में भीगें
और बहे बन के खुशी
इतना जो भी न किया
तो किस कम की ये दोस्ती

दोस्त जीवन सार है
दोस्त पे ये भार है

दोस्त जीवन सार है
दोस्त पे ये भार है
दोस्त दर्द को सहे
और कहे आगे चलें
तब है उस में दोस्ती
वरना वह है स्वार्थी

दोस्त जीवन सार है
दोस्त पे ये भार है

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