दोस्त जीवन सार है
दोस्त पे ये भार है
दोस्त की दोस्ती
को करें सिंचित कभी
जब उसे न पथ मिले
न मिले मंजिल कोई
दोस्त जीवन सार है
दोस्त पे ये भार है
दोस्त जीवन सार है
दोस्त पे ये भार है
दोस्त गम की बारिश में भीगें
और बहे बन के खुशी
इतना जो भी न किया
तो किस कम की ये दोस्ती
दोस्त जीवन सार है
दोस्त पे ये भार है
दोस्त जीवन सार है
दोस्त पे ये भार है
दोस्त दर्द को सहे
और कहे आगे चलें
तब है उस में दोस्ती
वरना वह है स्वार्थी
दोस्त जीवन सार है
दोस्त पे ये भार है
bahut sundar..........dhanywad
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