Wednesday, 29 July 2009

ये दोस्ती कहीं 'दोस्ताना' न बन जाय





इस बार का फ्रेंडशिप डे स्पेशल होने जा रहा है। क्योंकि जिस तरह हमारे देश में दोस्ती का क्रेज है वह सभी दोस्तों को इस दिन एक सूत्र में बाधने का काम करती है, लेकिन इस बार के दोस्ती दिवस पे दोस्तानो की भरमार देखी जा सकती है। जी हाँ ,वही दोस्ताना जिसे अंग्रेजी में 'GAY' कहतें है।
गे सभ्यता ने भारतीये नवयुवको को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है। ऐसे में फ्रेंडशिप डे को ये गे जोड़े,दोस्ती को दोस्ताना में बदलने की हर सम्भव कोशिश करेंगे।
राजधानी का जंतर मंतर तो दोस्तानो के परेड को भी देख चुका है। अब बात अगर फ्रेंडशिप डे की कि जाय तो यह सबसे ज्यादा कॉल्लेजो के कैम्पस में देखने को मिलता है। जहाँ हर साल नये दोस्त बनाने का रिवाज रहा है। दिल्ली विश्वविधायालय भी फ्रेंडशिप डे से अछुता नही है। और डी यू के कॉल्लेजो में भी इस दिन को खूब मस्ती और प्यार के साथ मनाया जाता है। दिल्ली विश्वविधायालय में अभी नया सत्र शुरू ही हुआ है और फ्रेंडशिप डे है वाकई फ्रेंडशिप डे बिछडे दोस्त, रूठे दोस्त , और नये दोस्त बनाने का मिशाल रहा है। सभी दोस्तों के लिए अपने गिले शिकवे को दूर करने का यह सबसे सुनहरा दिन होता है। दिल्ली विश्वविधायालय के लिए तो फ्रेंडशिप डे बहुत से मायने में खास होता है क्योंकि एक तो नये स्टूडेंट्स दोस्ती के रंग में डूब जाते है, दोस्तीछात्र चुनावो कि सरगर्मी भी फ्रेंडशिप डे में खूब देखनो को मिलती है।








अब दोस्ती के नये ट्रेंड जो दोस्ताना की तरफ रुख करने लगी है कोल्लेज कैम्पस में भी देखने को मिल सकती है

भला इनको अब कौन रोकेगा ?

एंटी रेगिंग के लिए तो कानून ने साथ दिया, और रेगिंग पर पुरी तरह काबू पा लिया गया। लेकिन दोस्ताना कल्चर को तो कानून ने मान्यता दे दिया है। ऐसे में दोस्तों, दोस्ती के मतलब को समझो क्योंकि हमारे देश में दोस्ती की मिशाल महाभारत काल से ही देखने को मिलती है। यह देश कर्ण और सुदामा जैसे दोस्तों की कर्मभूमि है। और अब दोस्ती भी आधुनिकता की ओर भटकी है

जिस रिश्तें को समाज हास्य व्यंग की तरह देखती थी उसे आधुनिकता ने दोस्ताना का ना दे दिया है। इन सब नये आकर्षण के बावजूद भी दोस्ती एक ऐसा रंग है, जो हर रिश्ते के चादर पे अच्छी लगती है










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