नाबालिक बच्चों के खून से काँग्रेशी नेता ने मनायी राजीव गाँधी जन्मोत्सव
सामाजिक कल्याण और भारतीय राजनीति का संबंध आजादी के समय से ही है। और सभी राजनैतिक नेता अपने आप को एक सामाजिक कल्याण कर्ता मानते हैं। समाज से जुड़े मुद्दे और उससे मिलनेवाली वोट नेताओं के लिए सबसे अहम मुद्दा होता है। इस बात की प्रमाणिकता राजीव गाँधी के जन्मोत्सव पर जयपुर के निकट गाँव में देखने को मिली है।
विधायक महोदय अपने बर्चस्व को बढाने के लिए राजीव गाँधी के जन्म दिवस पे रक्तदान सिविर लगा के अपने और अपने पार्टी के लिए वाहवाही बटोरना चाहते थे, लेकिन ये कौन सा तरिका है, वाहवाही बटोरने का, जो पार्टी तथा समाज दोनों को आघात पहुचाती है ? मासुम बच्चों को प्रमाण पत्र और कई अन्य तरह के प्रलोभन देने का वादा और उसके बदले खून।
राजनीति में शायद सब जायज हो, मगर हमारे देश
के कानून में नाबालिक बच्चों से रक्तदान कराना जुर्म है। अब ऐसे में काँग्रेश के लिए यह अहम सवाल है कि, वह ऐसे विधायक के साथ किस तरह का बरताव करती है।
हमारे देश में मुद्दा हमेशा राजनीतिक गलियारों में खो जाती है। एक तरफ वो नाबालिक बच्चे हैं, जिनसे रक्तदान करवाया गया, तो दूसरी ओर विधायक जी हैं, जिन्होनें न सिर्फ इन बच्चो से रक्तदान करवाया वरन नकली
ऊर्म प्रमाण पत्र भी बना डाले। अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आश्वासन देकर पल्लु झाड़ते हैं या राजनीति के शतरंज पे दूरगामी सोच के साथ कोई कारवाई करते हैं। लेकिन कुछ भी हो मासुम बच्चो के खून की भरपाई नही की जा सकती है।
बहुत अच्छा लिखा है. येसे ही लिखते रहे. आप की पानी नजर से कुछ भी नहीं बच कर निकलना चाहिए. एक पत्रकार के लिए यही जरुरी है. समाज में क्या कुछ हो रहा है, इस पर पैनी नजर पत्रकार ही रखता है .
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