बदलाव का गवाह ‘रामलीला मैदान’
जिन्ना से लेकर अन्ना तक
दिल्ली में यूं तो कई ऐसी मशहूर और ऐतिहासिक जगहें हैं जो हमेशा चर्चा में रहती हैं...पर दिल्ली का रामलीला मैदान शुरू से ही राजनीतिक हलचलों की वजह से चर्चा का केंद्र रहा है... दिल्ली का रामलीला मैदान हमेशा से ही सरकार के विरोध, धरना प्रदर्शन या रैलियों के लिए सबसे कारगर जगह साबित हुआ है... खुली जगह और हर जगह से यहां पहुंच पाने की सुविधा इसे और भी खास बनाती है...आइए जानें इस ऐतिहासिक रामलीला मैदान की कुछ खास बातें. यूँ तो दिल्ली का रामलीला मैदान हर साल उस समय चर्चा में आता है जब दशहरे के मौके पर रामलीला का मंचन होता है और उसके बाद रावणदहन होता है...कहा जाता है कि इस मैदान को अंग्रेज़ो ने 1883 में ब्रिटिश सैनिकों के शिविर के लिए तैयार करवाया था. समय के साथ-साथ पुरानी दिल्ली के कई संगठनों ने इस मैदान में रामलीलाओं का आयोजन करना शुरु कर दिया, यही से इस ऐतिहासिक मैदान को रामलीला मैदान का नाम मिला...दिल्ली के दिल में इससे बड़ी खुली जगह और कोई नही थी इसलिए रैली जैसे बड़े आयोजनों और आम जनता से सीधे संवाद के लिए ये मैदान राजनेताओं का पंसदीदा मैदान बन गया. गु़लाम भारत और आज़ाद भारत के इतिहास में ऐसे मौकों की कोई कमी नही है जब रामलीला मैदान ने अपना नाम दर्ज न कराया हो...ये मैदान देश के इतिहास के बदलने का गवाह रहा है...आज़ादी की लड़ाई के दौरान महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल और दूसरे नेताओं के लिए विरोध जताने का ये सबसे पसंदीदा मैदान बन गया था...इसी मैदान पर मोहम्मद अली जिन्ना से जवाहर लाल नेहरू तक और बाबा राम देव से लेकर अन्ना हज़ार तक सारे लोग इसी मैदान से क्रांति की शुरुआत करते रहे हैं...यही वो मैदान है जहां 1945 में हुई एक रैली में भीड़ ने जिन्ना को मौलाना की उपाधि दे दी थी...लेकिन मोहम्मद अली जिन्ना ने मौलाना की इस उपाधि पर भीड़ से नाराज़गी जताई और कहा कि वो राजनीतिक नेता है न कि धार्मिक मौलाना....
जिन्ना से लेकर अन्ना तक
दिल्ली में यूं तो कई ऐसी मशहूर और ऐतिहासिक जगहें हैं जो हमेशा चर्चा में रहती हैं...पर दिल्ली का रामलीला मैदान शुरू से ही राजनीतिक हलचलों की वजह से चर्चा का केंद्र रहा है... दिल्ली का रामलीला मैदान हमेशा से ही सरकार के विरोध, धरना प्रदर्शन या रैलियों के लिए सबसे कारगर जगह साबित हुआ है... खुली जगह और हर जगह से यहां पहुंच पाने की सुविधा इसे और भी खास बनाती है...आइए जानें इस ऐतिहासिक रामलीला मैदान की कुछ खास बातें. यूँ तो दिल्ली का रामलीला मैदान हर साल उस समय चर्चा में आता है जब दशहरे के मौके पर रामलीला का मंचन होता है और उसके बाद रावणदहन होता है...कहा जाता है कि इस मैदान को अंग्रेज़ो ने 1883 में ब्रिटिश सैनिकों के शिविर के लिए तैयार करवाया था. समय के साथ-साथ पुरानी दिल्ली के कई संगठनों ने इस मैदान में रामलीलाओं का आयोजन करना शुरु कर दिया, यही से इस ऐतिहासिक मैदान को रामलीला मैदान का नाम मिला...दिल्ली के दिल में इससे बड़ी खुली जगह और कोई नही थी इसलिए रैली जैसे बड़े आयोजनों और आम जनता से सीधे संवाद के लिए ये मैदान राजनेताओं का पंसदीदा मैदान बन गया. गु़लाम भारत और आज़ाद भारत के इतिहास में ऐसे मौकों की कोई कमी नही है जब रामलीला मैदान ने अपना नाम दर्ज न कराया हो...ये मैदान देश के इतिहास के बदलने का गवाह रहा है...आज़ादी की लड़ाई के दौरान महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल और दूसरे नेताओं के लिए विरोध जताने का ये सबसे पसंदीदा मैदान बन गया था...इसी मैदान पर मोहम्मद अली जिन्ना से जवाहर लाल नेहरू तक और बाबा राम देव से लेकर अन्ना हज़ार तक सारे लोग इसी मैदान से क्रांति की शुरुआत करते रहे हैं...यही वो मैदान है जहां 1945 में हुई एक रैली में भीड़ ने जिन्ना को मौलाना की उपाधि दे दी थी...लेकिन मोहम्मद अली जिन्ना ने मौलाना की इस उपाधि पर भीड़ से नाराज़गी जताई और कहा कि वो राजनीतिक नेता है न कि धार्मिक मौलाना....
इस मैदान का इस्तेमाल सरकारी रैलियों और सत्ता के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने जैसी दोनो ही परिस्थितियों में किया गया...दिसंबर 1952 में रामलीला मैदान में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सत्याग्रह किया था. इससे सरकार हिल गई थी. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1956 और 57 में मैदान में विशाल जनसभाएं की…जयप्रकाश नारायण ने इसी मैदान से कांग्रेस सरकार के ख़िलाफ़ हुंकार भरी थी...25 जून 1975 को इसी मैदान पर लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने विपक्षी नेताओं के साथ ये ऐलान कर दिया था कि इंदिरा गांधी की तानाशाही सरकार को उखाड़ फेंका जाए...28 जनवरी, 1961 को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ ने रामलीला मैदान में ही एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था...1965 में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इसी मैदान पर एक विशाल जनसभा में जय जवान, जय किसान का नारा एक बार फिर दोहराया था...1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बांग्ला देश के निर्माण और पाकिस्तान से युद्ध जीतने का जश्न मनाने के लिए इसी मैदान में एक बड़ी रैली की थी और जहां उन्हें जनता का भारी समर्थन मिला था. ये वो ही रामलीला मैदान है जहां बाबा रामदेव ने काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना अनशन किया था लेकिन 5 जून 2011 उनके अनशन पर दिल्ली पुलिस ने लाठियां बरसा कर उन्हें वहां से हरिद्वार भेज दिया था. वहीं आधुनिक भारत का सबसे विशाल जनसैलाब भी इसी मैदान में उमड़ा जब समाजसेवी अन्ना हजारे ने जनलोकपाल बिल के लिए सरकार के खिलाफ मुहिम छेड़ दी...इतिहास बताता है कि ये मैदान 128 साल का हो चुका है. वर्ष 1883 में अंग्रेजों ने इसे अपने सैनिकों के कैंप के लिए तैयार करवाया था. मैदान में उनके लिए तंबू वाले घर बनाए गए थे. अंग्रेजों ने मैदान में कई आयोजन भी कराए.
एक बार फिर दिल्ली का ये मैदान नया इतिहास लिखने को तैयार है...जी हां...दिल्लीं और देश की राजनीति के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब किसी सूबे के मुख्यामंत्री के तौर पर शपथ राजभवन में नहीं, बल्कि एक मैदान में ली गई है... यह कीर्तिमान आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने बनाया है...वह अपने साथ छह विधायक को भी मंत्रीपद की शपथ दिलाएंगे...दरअसल रामलीला मैदान में दिल्ली की नई सिसायत का नया और अनोखा मिशाल बना है..
एक बार फिर दिल्ली का ये मैदान नया इतिहास लिखने को तैयार है...जी हां...दिल्लीं और देश की राजनीति के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब किसी सूबे के मुख्यामंत्री के तौर पर शपथ राजभवन में नहीं, बल्कि एक मैदान में ली गई है... यह कीर्तिमान आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने बनाया है...वह अपने साथ छह विधायक को भी मंत्रीपद की शपथ दिलाएंगे...दरअसल रामलीला मैदान में दिल्ली की नई सिसायत का नया और अनोखा मिशाल बना है..


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