Saturday, 23 January 2016

तुम दिल्ली, चाहत सी मेरी

तुम दिल्ली, चाहत सी मेरी
रात रागनी, नई नवेली
सुबह ओस सी होठ तुम्हारे
हंसते ही पड़ जाए गालों पर दरारें
थोड़ी मीठी, थोड़ी मय जैसी
तुम दिल्ली, चाहत सी मेरी

तुम अलसाई, अंगड़ाई सी दिल्ली
दिन चढ़ते मुस्काई दिल्ली
शाम सांस बनकर हो चलती
धड़कन सी हो तुम मेरी दिल्ली
शहर में तुम हो, तुम सा ये शहर है
पूछूं तो इतराये दिल्ली

नैन-नक्श मिलता है सबकुछ
जैसे तुम बकबक करती हो
कुछ भी कहां सुनता है दिल्ली
तुम दिल्ली, तृप्ती सी मेरी

तुम में जिनता शोरगुल है
उतनी चंचल सी वो पागल है
आसमान से आगे का रास्ता
उसपर चलने को वो व्याकुल है

तुम जैसी ही ढीठ वो जिद्दी
प्यारी भी तुमसी है दिल्ली
दिल्ली तुमसे मैं मिलता हूं
तुमसा रौशन हो जाता हूं

मेरी इशक कहानी तुम से
होके जुदा कहां रौशन रहता हूं
ऐसी प्यास, अधूरी दिल्ली
तुम दिल्ली, चाहत सी मेरी

Saturday, 9 January 2016

सुशासन का 'गन'तंत्र

बिहार में भले ही सुशासन बाबू नीतीश कुमार की सरकार है...लेकिन लगता है कि बिहार में अपराधियों के लिए बहार है...शायद यही वजह है कि दारोगा को गोलियों से छलनी कर दी जाती है...खुलेआम हथियारों की आजमाइश होती है....और कार्रवाई के नाम पर महज आश्वसान मिलता है...


बिहार में सुशासन का राज स्थापित करने का दावा सीएम नीतीश का कतई चुनावी नहीं था....उन्होंने अपने पिछले दस साल के कार्यकाल में ये काफी हद तक साबित कर दिया था कि बिहार में जंगल राज बीते दिनों की बात है....लेकिन अब जबकि नीतीश कुमार पांचवीं बार सत्तासीन हुए हैं...तो उनके सामने सुशासन के राज को कायम रखने की सबसे बड़ी चुनौती आन पड़ी है....एक के बाद एक बिहार में आपराधिक वारदातों ने नीतीश के राज पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है....सांस्कृतिक धरोहर से भरपूर वैशाली में दहशत की आग आसमान छू रही है...जी हां....क्योंकि हाजीपुर सदर थाना क्षेत्र के मनुआ में सड़क किनारे चौर में ASI अशोक कुमार यादव को गोलियों से छलनी कर दी जाती है...आरोपी एएसआई का पिस्टल लेकर फरार हो जाता है....और किसी को भनक तक नहीं लगता...एएसआई अशोक कुमार वैशाली के दारोगा थे...अब सोचिये...अगर दारोगा बाबू की सरेराह हत्या कर दी जाए...तो सुशासन के राज पर सवाल उठना लाजिमी है....

शोहदों के सर पर किसका हाथ ?

जी हां...ये सवाल भी सुशासन बाबू नीतीश कुमार से की जानी चाहिए कि आखिर शोहदें किसके शह पर वारदातों को बेखौफ होकर अंजाम दे रहे हैं....नीतीश बाबू ऐसी वारदातों पर गौर करना चाहिए...कैसे शोहदें हाथों को लहराते ... हेला बाजार के निजी क्लीनिक पर फायरिंग करते हैं....बेखौफी की इंतहां यहीं नहीं रुकती...अपराधी एक के बाद एक 12 राउंड फायरिंग करता है....बड़े इत्मीनान से क्लीनिक में घुसता है...धमकी देता है और फिर बड़ी बेफिक्री से बाहर निकल...फरार हो जाता है...

पुलिस महकमा हर वारदात के बाद, जो करती और कहती है...वही हाजीपुर के इन दोनों वारदातों के बादकही और की जा रही है....बहरहाल ये वारदातें के सामने से जनता अब पूछना चाह रही है...क्या इसे सुशासन राज कहते हैं...या फिर बिहार में 'गन' तंत्र की स्थापना हो गयी है...
 


मैं पलामू की गंगा हूं

एक नदी के ह्रदय से अगर कराह की आवाज निकले....एक नदी अगर अपनी कलकलाहट को छोड़... मौन हो जाये....एक नदी की आत्मा को जब समाज दूषित करने लगे...तो उस नदी के दर्द को समझना जरूरी है....तो पलामू की गंगा...यानी कोयल नदी की कहानी



मैं पलामू की गंगा हूं....मुझे यहां के लोग कोयल नदी के नाम से जानते हैं....मैं अपनी सुनदरता, स्वच्छता, अविरलता के लिए दशकों तक चर्चित रही...मैं समाज को जीवन...प्रकृति को सौन्दर्य...और राज्य को समृद्धि प्रदान करती हूं...लेकिन आज मेरे स्वछंदता पर सवाल है...मेरी अविरलता का अस्तित्व खत्म हो रहा है...मैं खुद अपनी सुनदरता को तरस रही हूं...राज्य व्यवस्था मुझे कूड़े कचरों की वाहिनी बनाने पर तुली है...लेकिन फिर भी मैं अपने भाग्य पर रोना नहीं चाहती हूं....मैं सत्तासीनों को याद दिलाना चाहती हूं कि ... मैं जीवन हूं....और मेरे अस्तित्व से खिलवाड़ तुम्हारा नाश का कारण बन सकता है...इसलिए शासकों, अपनी निन्द्रा से उठो....प्रशासन लापरवाही की हदों को पहचानों और लोगों अपनी मानवता को टटोलो...नहीं तो ऐसा ना हो कि मैं...जीवनदायनी नदी...हमेशा के लिए लुप्त हो जाऊं....क्योंकि सरकार से लेकर जनता तक सभी को पता है कि मेरे पर लाखों आबादी निर्भर है...सिंचाई से लेकर पीने के पानी तक के लिए प्रतिदिन लाखों लोगों का जीवन का आधार हूं....मैं खुद अब सरकार और प्रशासन से अपने अस्तित्व को बनाये रखने की गुहार कर रही हूं...मुझे कूड़े के ढेर...बेतरतीब गंदरी के अंबार से बचा लो....

देश की बिडंवना है कि प्रधानमंत्री और उनके मंत्री स्वच्छता अभियान चलाते हैं...पूरे विश्व में वाहवाही लूटी जाती है...लेकिन परिणाम मेरी तस्वीर है....मुझे लेकर राजनीतिक पार्टियां राजनीति करती हैं...एक  मुझे अविरल और स्वच्छ बनाने का दावा करती है...तो दूसरा मुझे मुद्दा बना कर सरकार को कोसने का.... 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पलामू की जनता को पानी की समस्या से निजात दिलाने का दावा किया था...लेकिन मुझे प्रतिदिन अभी भी दूषित किया जा रहा है....मैं भले शिकायत कितनी भी कर लूं...लेकिन सरकार है कि अपने अभियान को सफल मानकर खुद पीठ थपथपा रही है....मेरे दिल से निकल रही कराह को अगर सरकार सुन ले तो मुझ पर बड़ा उपकार होगा....मैं गंगा बहती हूं क्यों ?