बिहार में
भले ही सुशासन बाबू नीतीश कुमार की सरकार है...लेकिन लगता है
कि बिहार में अपराधियों के लिए बहार है...शायद यही वजह है कि
दारोगा को गोलियों से छलनी कर दी जाती है...खुलेआम हथियारों की
आजमाइश होती है....और कार्रवाई के नाम पर महज आश्वसान मिलता है...
बिहार में
सुशासन का राज स्थापित करने का दावा सीएम नीतीश का कतई चुनावी नहीं था....उन्होंने अपने पिछले दस साल के कार्यकाल में ये काफी हद तक साबित कर दिया था
कि बिहार में जंगल राज बीते दिनों की बात है....लेकिन अब जबकि
नीतीश कुमार पांचवीं बार सत्तासीन हुए हैं...तो उनके सामने सुशासन
के राज को कायम रखने की सबसे बड़ी चुनौती आन पड़ी है....एक के
बाद एक बिहार में आपराधिक वारदातों ने नीतीश के राज पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है....सांस्कृतिक धरोहर से भरपूर वैशाली में दहशत की आग आसमान छू रही है...जी हां....क्योंकि हाजीपुर सदर थाना क्षेत्र के मनुआ
में सड़क किनारे चौर में ASI अशोक कुमार यादव को गोलियों से छलनी
कर दी जाती है...आरोपी एएसआई का पिस्टल लेकर फरार हो जाता है....और किसी को भनक तक नहीं लगता...एएसआई अशोक कुमार वैशाली
के दारोगा थे...अब सोचिये...अगर दारोगा
बाबू की सरेराह हत्या कर दी जाए...तो सुशासन के राज पर सवाल उठना
लाजिमी है....
शोहदों
के सर पर किसका हाथ ?
जी हां...ये सवाल भी सुशासन बाबू नीतीश कुमार से की जानी चाहिए कि आखिर शोहदें किसके
शह पर वारदातों को बेखौफ होकर अंजाम दे रहे हैं....नीतीश बाबू
ऐसी वारदातों पर गौर करना चाहिए...कैसे शोहदें हाथों को लहराते
... हेला बाजार के निजी क्लीनिक पर फायरिंग करते हैं....बेखौफी की इंतहां यहीं नहीं रुकती...अपराधी एक के बाद
एक 12 राउंड फायरिंग करता है....बड़े इत्मीनान
से क्लीनिक में घुसता है...धमकी देता है और फिर बड़ी बेफिक्री
से बाहर निकल...फरार हो जाता है...
पुलिस महकमा
हर वारदात के बाद, जो करती और कहती है...वही हाजीपुर के इन दोनों वारदातों के बाद, कही और की जा रही है....बहरहाल ये वारदातें के सामने से जनता अब पूछना चाह रही है...क्या इसे सुशासन राज कहते हैं...या फिर बिहार में
'गन' तंत्र की स्थापना हो गयी है...


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