Saturday, 23 January 2016

तुम दिल्ली, चाहत सी मेरी

तुम दिल्ली, चाहत सी मेरी
रात रागनी, नई नवेली
सुबह ओस सी होठ तुम्हारे
हंसते ही पड़ जाए गालों पर दरारें
थोड़ी मीठी, थोड़ी मय जैसी
तुम दिल्ली, चाहत सी मेरी

तुम अलसाई, अंगड़ाई सी दिल्ली
दिन चढ़ते मुस्काई दिल्ली
शाम सांस बनकर हो चलती
धड़कन सी हो तुम मेरी दिल्ली
शहर में तुम हो, तुम सा ये शहर है
पूछूं तो इतराये दिल्ली

नैन-नक्श मिलता है सबकुछ
जैसे तुम बकबक करती हो
कुछ भी कहां सुनता है दिल्ली
तुम दिल्ली, तृप्ती सी मेरी

तुम में जिनता शोरगुल है
उतनी चंचल सी वो पागल है
आसमान से आगे का रास्ता
उसपर चलने को वो व्याकुल है

तुम जैसी ही ढीठ वो जिद्दी
प्यारी भी तुमसी है दिल्ली
दिल्ली तुमसे मैं मिलता हूं
तुमसा रौशन हो जाता हूं

मेरी इशक कहानी तुम से
होके जुदा कहां रौशन रहता हूं
ऐसी प्यास, अधूरी दिल्ली
तुम दिल्ली, चाहत सी मेरी

Saturday, 9 January 2016

सुशासन का 'गन'तंत्र

बिहार में भले ही सुशासन बाबू नीतीश कुमार की सरकार है...लेकिन लगता है कि बिहार में अपराधियों के लिए बहार है...शायद यही वजह है कि दारोगा को गोलियों से छलनी कर दी जाती है...खुलेआम हथियारों की आजमाइश होती है....और कार्रवाई के नाम पर महज आश्वसान मिलता है...


बिहार में सुशासन का राज स्थापित करने का दावा सीएम नीतीश का कतई चुनावी नहीं था....उन्होंने अपने पिछले दस साल के कार्यकाल में ये काफी हद तक साबित कर दिया था कि बिहार में जंगल राज बीते दिनों की बात है....लेकिन अब जबकि नीतीश कुमार पांचवीं बार सत्तासीन हुए हैं...तो उनके सामने सुशासन के राज को कायम रखने की सबसे बड़ी चुनौती आन पड़ी है....एक के बाद एक बिहार में आपराधिक वारदातों ने नीतीश के राज पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है....सांस्कृतिक धरोहर से भरपूर वैशाली में दहशत की आग आसमान छू रही है...जी हां....क्योंकि हाजीपुर सदर थाना क्षेत्र के मनुआ में सड़क किनारे चौर में ASI अशोक कुमार यादव को गोलियों से छलनी कर दी जाती है...आरोपी एएसआई का पिस्टल लेकर फरार हो जाता है....और किसी को भनक तक नहीं लगता...एएसआई अशोक कुमार वैशाली के दारोगा थे...अब सोचिये...अगर दारोगा बाबू की सरेराह हत्या कर दी जाए...तो सुशासन के राज पर सवाल उठना लाजिमी है....

शोहदों के सर पर किसका हाथ ?

जी हां...ये सवाल भी सुशासन बाबू नीतीश कुमार से की जानी चाहिए कि आखिर शोहदें किसके शह पर वारदातों को बेखौफ होकर अंजाम दे रहे हैं....नीतीश बाबू ऐसी वारदातों पर गौर करना चाहिए...कैसे शोहदें हाथों को लहराते ... हेला बाजार के निजी क्लीनिक पर फायरिंग करते हैं....बेखौफी की इंतहां यहीं नहीं रुकती...अपराधी एक के बाद एक 12 राउंड फायरिंग करता है....बड़े इत्मीनान से क्लीनिक में घुसता है...धमकी देता है और फिर बड़ी बेफिक्री से बाहर निकल...फरार हो जाता है...

पुलिस महकमा हर वारदात के बाद, जो करती और कहती है...वही हाजीपुर के इन दोनों वारदातों के बादकही और की जा रही है....बहरहाल ये वारदातें के सामने से जनता अब पूछना चाह रही है...क्या इसे सुशासन राज कहते हैं...या फिर बिहार में 'गन' तंत्र की स्थापना हो गयी है...
 


मैं पलामू की गंगा हूं

एक नदी के ह्रदय से अगर कराह की आवाज निकले....एक नदी अगर अपनी कलकलाहट को छोड़... मौन हो जाये....एक नदी की आत्मा को जब समाज दूषित करने लगे...तो उस नदी के दर्द को समझना जरूरी है....तो पलामू की गंगा...यानी कोयल नदी की कहानी



मैं पलामू की गंगा हूं....मुझे यहां के लोग कोयल नदी के नाम से जानते हैं....मैं अपनी सुनदरता, स्वच्छता, अविरलता के लिए दशकों तक चर्चित रही...मैं समाज को जीवन...प्रकृति को सौन्दर्य...और राज्य को समृद्धि प्रदान करती हूं...लेकिन आज मेरे स्वछंदता पर सवाल है...मेरी अविरलता का अस्तित्व खत्म हो रहा है...मैं खुद अपनी सुनदरता को तरस रही हूं...राज्य व्यवस्था मुझे कूड़े कचरों की वाहिनी बनाने पर तुली है...लेकिन फिर भी मैं अपने भाग्य पर रोना नहीं चाहती हूं....मैं सत्तासीनों को याद दिलाना चाहती हूं कि ... मैं जीवन हूं....और मेरे अस्तित्व से खिलवाड़ तुम्हारा नाश का कारण बन सकता है...इसलिए शासकों, अपनी निन्द्रा से उठो....प्रशासन लापरवाही की हदों को पहचानों और लोगों अपनी मानवता को टटोलो...नहीं तो ऐसा ना हो कि मैं...जीवनदायनी नदी...हमेशा के लिए लुप्त हो जाऊं....क्योंकि सरकार से लेकर जनता तक सभी को पता है कि मेरे पर लाखों आबादी निर्भर है...सिंचाई से लेकर पीने के पानी तक के लिए प्रतिदिन लाखों लोगों का जीवन का आधार हूं....मैं खुद अब सरकार और प्रशासन से अपने अस्तित्व को बनाये रखने की गुहार कर रही हूं...मुझे कूड़े के ढेर...बेतरतीब गंदरी के अंबार से बचा लो....

देश की बिडंवना है कि प्रधानमंत्री और उनके मंत्री स्वच्छता अभियान चलाते हैं...पूरे विश्व में वाहवाही लूटी जाती है...लेकिन परिणाम मेरी तस्वीर है....मुझे लेकर राजनीतिक पार्टियां राजनीति करती हैं...एक  मुझे अविरल और स्वच्छ बनाने का दावा करती है...तो दूसरा मुझे मुद्दा बना कर सरकार को कोसने का.... 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पलामू की जनता को पानी की समस्या से निजात दिलाने का दावा किया था...लेकिन मुझे प्रतिदिन अभी भी दूषित किया जा रहा है....मैं भले शिकायत कितनी भी कर लूं...लेकिन सरकार है कि अपने अभियान को सफल मानकर खुद पीठ थपथपा रही है....मेरे दिल से निकल रही कराह को अगर सरकार सुन ले तो मुझ पर बड़ा उपकार होगा....मैं गंगा बहती हूं क्यों ?




Monday, 28 December 2015

एक राष्ट्र का जन्म

44 सालों पहले की बात है...जब ढाका में पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण किया था।...पूर्वी पाकिस्तान के कमांडर जनरल नियाजी को जब आत्मसमर्पण की शर्तें पढ़कर सुनाई जा रही थी... तब उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में अपनी ओर देख रहे वरिष्ठ भारतीय सैन्य अधिकारी से कहा था...कौन कह रहा है कि मैं हथियार डाल रहा हूं...और ये उनके आत्मसमर्पण से पहले आखिरी शब्द थे... उसके बाद जो हुआ, वो समूची दुनिया जानती है...भारत के सामने पाकिस्तान को  घुटना टेकना पड़ा...और उस एतेहासिक दिन को भारत कभी नहीं भुला सकता है... 


आज 16 दिसंबर है...आज के दिन पूरा भारत और सेना विजय दिवस मनाती है.... ये दिन भारत के इतिहास में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन अमेरिका सहित दूसरे देशों की ताकत के घमंड में चूर... पाकिस्तान का हर इरादा ध्वस्त कर दिया गया था.... और बांग्लादेश के नाम से नए देश का उदय हुआ था. भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ 1971 का युद्ध भारतीय इतिहास में हमेशा अमर रहेगा....लगभग दो हफ्ते ...3 से 16 दिसंबर तक चले इस युद्ध के बाद दुनिया के पटल पर बांग्लादेश नामक नए मुल्क का उदय हुआ.... भारतीय जाबांजों के साहस और जीवटता के आगे पाकिस्तानी सेना ने घुटने टेक दिए थे.... इसे भारत की अब तक की सबसे बड़ी युद्ध विजय कहा जाता है....और इसलिए 16 दिसंबर को भारत विजय दिवस मनाता है....25 मार्च, 1971 को पाकिस्तान के सैनिक तानाशाह याहिया खां ने पूर्वी पाकिस्तान की जन भावनाओं को सैन्य ताकत से कुचलने का आदेश दिया.... पाकिस्तानी सेना ने बांग्लादेश के बड़े नेता शेख मुजीबुर्रहमान को गिरफ्तार कर दमन चक्र शुरू कर दिया....  इधर परेशान और आहत पूर्वी पाकिस्तान के लोगों का हिंदुस्तान आने का सिलसिला शुरू हुआ....पाकिस्तानी सेना के दमन चक्र बढ़ने के बाद भारत पर दबाव पड़ने लगा कि वह पूर्वी पाकिस्तान में सैन्य हस्तक्षेप करे.... तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस मसले पर थलसेना अध्यक्ष जनरल मानकेशॉ से राय मांगी....मानेक शॉ ने इंदिरा गांधी को साफ कर दिया कि वह पूरी तैयारी के साथ ही जंग के मैदान में उतरना चाहेंगे...3 दिसंबर 1971 को अचानक पाकिस्तानी वायुसेना ने भारतीय सीमा पर पठानकोट, श्रीनगर, अमृतसर, जोधपुर और आगरा के सैनिक हवाई अड्डों पर बम गिराने शुरू कर दिए....  इस हमले को ऑपरेशन चंगीज् खान कहा जाता है... कलकत्ता में जनसभा कर रहीं इंदिरा गांधी ने उसी समय दिल्ली लौटने का फैसला किया.... मंत्रिमंडल की आपात बैठक के बाद इंदिरा गांधी ने रेडियो पर राष्ट्र को संबोधित किया....भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी और फिर शुरू हुई भारतीय सेना की अमर गाथा...पूर्व में तेजी से आगे बढ़ते हुए भारतीय सेना ने जेसोर और खुलना पर कब्जा कर लिया.... तंगेल पर कब्जा और पाकिस्तानी सेना के ढाका भागने वाले मार्गों को बंद करने के तुरंत बाद मानके शॉ ने पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल नियाजी को अपना संदेश भेजकर आत्मसमर्पण करने को कहा....  इस युद्ध में पूर्वी कमान के स्टाफ ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल जेएफआर जैकब की भी अहम भूमिका रही....पाकिस्तान के पास ढाका के अंदर 26 हजार 400 सैनिक थे जबकि भारत के पास सिर्फ 3000 सैनिक थे फिर भी 15 दिसंबर को पाकिस्तानी सेनापति जनरल एके नियाजी ने युद्धविराम की प्रार्थना की.... 16 दिसंबर 1971 को 97 हजार 368 पाकिस्तानी फौजों ने आत्मसमर्पण कर दिया. याहिया खां पूरी तरह हार मानने को बिबस हो गए. इस तरह बांग्लादेश नामक नए देश का उदय हो गया....

अदभुत, अद्वितीय, 'अटल'

भारत के राजनीतिक इतिहास में अटल बिहारी बाजपेयी का संपूर्ण व्यैक्तिक विकास शिखर पुरुष के रुप में दर्ज हैं....भारत में ही नहीं बल्कि... दुनिया में उनकी पहचान एक कुशल राजनीतिक राजनीतिज्ञ... प्रशासक... भाषाविद्.... कवि... पत्रकार और लेखक के रूप में है... स्वाधीनता आंदोलन से लेकर आपातकाल और आधुनिक भारत की राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी एक अटल योद्धा की धुरी हैं....राजनीति में उदारवाद के सबसे बड़े समर्थक हैं अलट.... वे विचारधारा की कीलों से कभी अपने को नहीं बांधा... राजनीति को दलगत और स्वार्थ की वैचारिकता से अलग हट कर अपनाया और उसको जिया.... जीवन में आने वाली हर विषम परिस्थितियों और चुनौतियों को स्वीकार किया... नीतिगत सिद्धांत और वैचारिकता का कभी कत्ल नहीं होने दिया... राजनीतिक जीवन के उतार चढ़ाव में उन्होंने आलोचनाओं के बाद भी अपने को फिट रखा...और अपने आप को अपनी गीतों की तरह रखा...कभी हार नहीं माना...कभी रार नहीं ठाना...तो आज बात अद्भुत, अद्वितीय अटल की... भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी...एक ऐसा नाम....जिसने राजनीति की नई परिभाषा गढ़ी...जिनके होने से विपक्ष का मर्यादा बढ़ा...जिनके कविताओं के ओज से देश मंत्र मुग्ध हो गया...ना सिर्फ देश...बल्कि पूरा विश्व पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के कुशल भाषण शैली का दिवाना रहा है...एक समय तो ऐसा भी आया था कि अमेरिका को भी अटल के दृढ निश्चय ने विचलित कर दिया था…25 दिसंबर 1924 ..... हिन्दुस्तान के इतिहास का सबसे स्वर्णीय दिनों में से दिन था....राष्ट्रीय क्षितिज पर स्वच्छ छवि के साथ अजातशत्रु कहे जाने वाले कवि और पत्रकार....सरस्वती पुत्र अटल बिहारी वाजपेयी....का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में ब्रह्ममुहर्त में हुआ
अटल जी का जन्म 25 दिसम्बर 1924 को ब्रह्ममुहर्त में ग्वालियर में हुआ था.... मान्यता के अनुसार अलट बिहारी की जन्म की खुशी में जहां घर में फूल की थाली बजाई जा रही थी ....तो वहीं पास के गिरजाघर में घंटियों और तोपों की आवाज के साथ प्रभु ईसामसीह का जन्मदिन मनाया जा रहा था... शिशु का नाम बाबा श्यामलाल वाजपेयी ने अटल रखा था.... माता कृष्णा देवी दुलार से उन्हे अटल्ला कहकर पुकारती थीं....अटल के पिता का नाम पं. कृष्ण बिहारी वाजपेयी था... वे हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेजी तीनों भाषा के विद्वान थे.... पं. कृष्णबिहारी वाजपेयी ग्वालियर राज्य के सम्मानित कवि थे... उनके द्वारा रचित ईश प्रार्थना राज्य के सभी विद्यालयों में कराई जाती थी....अटल जी की शिक्षा-दिक्षा ग्वालियर में ही सम्पन्न हुई....1939 में जब वे ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में अध्ययन कर रहे थे... तभी से राष्ट्रीय स्वंय संघ में जाने लगे थे... अपने दोस्त खानवलकर के साथ हरेक रविवार को आर्यकुमार सभा के कार्यक्रमों में भाग लेते थे... वहीं उनकी मुलाकात शाखा के प्रचारक नारायण जी से हुई... अटल जी उनसे बहुत प्रभावित हुए और रोज शाखा जाने लगे...


अटल बिहारी वाजपेयी - एक परिचय

बात 1957 की है....दूसरी लोकसभा में भारतीय जन संघ के सिर्फ़ चार सांसद थे.... इन सासंदों का परिचय तत्कालीन राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन से कराया गया....तब राष्ट्रपति ने हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि वो किसी भारतीय जन संघ नाम की पार्टी को नहीं जानते….अटल बिहारी वाजपेयी उन चार सांसदों में से एक थे.....लेकिन चार सांसदों वाला जनसंघ जो बाद में बीजेपी में तब्दील हो गया...देश की राजनीति में अहम मुकाम रखता है....यह सच है कि भारतीय जन संघ से भारतीय जनता पार्टी और सांसद से देश के प्रधानमंत्री तक के सफ़र में अटल बिहारी वाजपेयी ने कई पड़ाव तय किए.... नेहरु-गांधी परिवार के प्रधानमंत्रियों के बाद अटल बिहारी वाजपेयी का नाम भारत के इतिहास में उन चुनिंदा नेताओं में शामिल है.... जिन्होंने सिर्फ़ अपने नाम... व्यक्तित्व...और करिश्मे के बूते पर सरकार बनाई.... एक स्कूल टीचर के घर में पैदा हुए वाजपेयी के लिए शुरुआती सफ़र ज़रा भी आसान न था.... 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर के एक निम्न मध्यमवर्ग परिवार में जन्मे वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्वालियर के ही विक्टोरिया जो कि अब लक्ष्मीबाई कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज में हुई....उन्होंने राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर किया और पत्रकारिता में अपना करियर शुरू किया.... उन्होंने राष्ट्र धर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन का संपादन किया....

जन संघ और बीजेपी

1951 में वो भारतीय जन संघ के संस्थापक सदस्य थे....अपनी कुशल भाषण शैली से राजनीति के शुरुआती दिनों में ही उन्होंने रंग जमा दिया.... हालांकि लखनऊ से लोकसभा के उप चुनाव में वो हार गए थे.... 1957 में जन संघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ.. मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया.... लखनऊ में वो चुनाव हार गए... मथुरा में उनकी ज़मानत ज़ब्त हो गई... लेकिन बलरामपुर से चुनाव जीतकर वो दूसरी लोकसभा में पहुंचे...और अगले पांच दशकों के लिए उनके संसदीय करियर की यहीं से शुरुआत हुई....1968 से 1973 तक वो भारतीय जन संघ के अध्यक्ष रहे.... विपक्षी पार्टियों के अपने दूसरे साथियों की तरह उन्हें भी आपातकाल के दौरान जेल भेजा गया.... 1977 में जनता पार्टी सरकार में उन्हें विदेश मंत्री बनाया गया.... इस दौरान संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में उन्होंने हिंदी में भाषण दिया और वो इसे अपने जीवन का अब तक का सबसे सुखद क्षण बताते हैं.... 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी ने लालकृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर बीजेपी की संस्थापना की... 1980 से 1986 तक वो बीजेपी के अध्यक्ष रहे... और इस दौरान वो बीजेपी संसदीय दल के नेता भी रहे....

सांसद से प्रधानमंत्री

दूसरी लोकसभा से तेरहवीं लोकसभा तक अटल बिहारी वाजपेयी नौ बार लोकसभा के लिए चुने गए....हालांकि बीच में कुछ लोकसभाओं से उनकी अनुपस्थिति रही.... ख़ासतौर से 1984 में जब वो ग्वालियर में कांग्रेस के माधवराव सिंधिया के हाथों पराजित हो गए थे....1962 से 1967 और 1986 में वो राज्यसभा के सदस्य भी रहे....16 मई 1996 को वो पहली बार प्रधानमंत्री बने....लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा.... इसके बाद 1998 तक वो लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे.... 1998 के आम चुनाव में सहयोगी पार्टियों के साथ उन्होंने लोकसभा में अपने गठबंधन का बहुमत सिद्ध किया और इस तरह एक बार फिर प्रधानमंत्री बने.... लेकिन AIDMK का गठबंधन से समर्थन वापस ले लेने के बाद उनकी सरकार गिर गई... और एक बार फिर आम चुनाव हुए....

1999 में हुए चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साझा घोषणापत्र पर लड़े गए... और इस चुनाव में वाजपेयी के नेतृत्व को एक प्रमुख मुद्दा बनाया गया.... गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ और वाजपेयी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली....पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को 27 मार्च, 2015 को देश के सर्वोच्चय सम्मान भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया...जिसमें राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Saturday, 16 May 2015

अपनी गेसुओं से लड़ती रहती हैं वो

अपनी गेसुओं से लड़ती रहती हैं वो
लापरवाह तो नहीं....
पर जब भी देखूं, बड़ी रौशन लगती हैं वो


उनकी जुल्फों से जाके ऐ हवा तू ही कह दे
है खबर उनको भी...
फिर क्यों बेखबर सी रहती हैं वो

ये माना कि सितम का सिलसिला
उनके हुस्न और जुल्फों के बीच है
पर ये दिल सितम सहता है...
ये क्यों नहीं जानती हैं वो

अख्तियार सही न सही तेरा
गेसुओं के खुलने बिगड़ने पर
पर लुट सा जाता है रौशन
जब वो जुल्फों से लड़ती झगड़ती हैं

हो यकीन तुझको भले न ऐ जुल्फ
कुछ बेपरवाह, कुछ तुमसे खासमखास जुड़ी हैं वो
वजह यही है कि जब भी मैं...
उनकी जुल्फों को संवारने की कोशिश करुं तो
कुछ उनकी आंखें, कुछ आइना से हया उतार लेती हैं वो

उनकी फितरत पर शक है रौशन
बार-बार खुलती है, फिर भी बेमिसाल लगती हैं वो
दो चार गेसुओं के लट ऐसे भी हैं रौशन
जो बार-बार उनकी गालोें को चूमती हैं
फिर भी बेख्याल रहती हैं वो

इत्तेफाकन नहीं मेरी नजरों में उनकी जुल्फें आ बसी है
ये तो दिल है मेरा जो जानना चाहता है
जुल्फों पर इनायत इतना, रौशन से क्यों भागती हैं वो

अपनी गेसुओं से लड़ती रहती हैं वो
लापरवाह तो नहीं....
पर जब भी देखूं, बड़ी रौशन लगती हैं वो


Sunday, 10 May 2015

वो हवा बनूं, मैं दुआ करूं

वो जो चूमती तेरे लब को जो
वो हवा बनूं, मैं दुआ करूं
सुबह ओस की तरह तुम्हें भीगा सकूं
शाम जुगनूओं सी तुम में सजा करूं
           
                               मेरे यार, दोस्त, मेरा शहर, जहां
                               मेरी आरजू, मेरी इंतहां
                               इन्हें नाज है तुमपे उस ताज सा
                               जो महल है मोहब्बत की निशां

वो जो चूमती तेरे लब को जो
वो हवा बनूं, मैं दुआ करूं

                               वो जो जुल्फे रेशम तुझे रौशन करे
                               मैं घटा बनकर उसे बिगाड़ दूं
                               तू लड़ा करे अपने हुस्न से
                               मैं आइना बनकर तुझे सवार दूं

वो जो चूमती तेरे लब को जो
वो हवा बनूं, मैं दुआ करुं
 
                              कुछ ख्वाब अहसासों की हो
                               कोई लब्ज तेरा बन सकूं
                               वो जो गीत तेरे ओठों पर हो
                              वो मैं लिखूं, उसे मैं सुनूं

वो जो चूमती तेरे लब को जो
वो हवा बनु, मैं दुआ करूं

                               वो जो चहक उठना तेरा अंजुमन
                               वो पल बनूं, तुझपे फना करूं
                               वो कहीं दूर दरिया के साथ यूं
                               हाथों में हाथ लेकर चला करूं

वो जो चूमती तेरे लब को जो
वो हवा बनूं, मैं दुआ करूं
       
                              वो जो दिल तेरा, तेरे पास है
                              वो दिल बनूं, उस दिल में समा सकूं
                              तू यकीन कर मेरे इश्क पर
                              मैं रौशन सुबह तुझे दिखा सकूं
                                                  
वो जो चूमती तेरे लब को जो
वो हवा बनूं, मैं दुआ करूं
                            वो जो मानती जिसे रब है तू
                            वो शिला बनूं, तुझे पास अपने बुला सकूं
                            ये दिल के मजहब का सवाल है
                            तू कबूल कर, मैं दुनिया को बता सकूं

 वो जो फूल तितली परी रंग है
 सबसे कहूं तुमसे हया करे
वो जो चूमती तेरे लब को जो
वो हवा बनूं, मैं दुआ करूं